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सरसों का साग और मक्के की रोटी

सरसों का साग और मक्के की रोटी

सरसों का साग और मक्के की रोटी – देसी स्वाद की असली पहचान
Prep Time 30 minutes
Cook Time 45 minutes
Total Time 1 hour 15 minutes
Course Main Course
Cuisine Indian
Servings 4 people
Calories 240 kcal

Equipment

  • सरसों का साग और मक्के की रोटी

Ingredients
  

सरसों का साग बनाने की सामग्री

  • सरसों के पत्ते – करीब आधा किलो या जितना घर में लोग हों
  • पालक – 150–200 ग्राम इससे साग थोड़ा मुलायम बनता है
  • बथुआ – एक मुट्ठी या 100–150 ग्राम स्वाद बढ़ाता है
  • अदरक – एक इंच का टुकड़ा स्वाद भी और गर्माहट भी
  • लहसुन – 6–7 कलियाँ देसी खुश्बू के लिए
  • हरी मिर्च – 2–3 अपने स्वाद के अनुसार
  • प्याज़ – 1 बड़ा बारीक काट लें
  • टमाटर – 1–2 हल्की खटास के लिए
  • नमक – जितना आपको ठीक लगे
  • लाल मिर्च – आधा से एक चम्मच
  • मकई का आटा – 2–3 चम्मच साग गाढ़ा करने के लिए
  • घी – 2–3 चम्मच तड़के के लिए
  • हींग – एक छोटी चुटकी चाहें तो डालें नहीं तो छोड़ दें
  • थोड़ा पानी – पत्ते पकाने के लिए

मक्के की रोटी बनाने की सामग्री

  • मक्के का आटा – 2 कप जितनी रोटी चाहिए उसके हिसाब से
  • गुनगुना पानी – आटा गूँथने के लिए
  • नमक – एक चुटकी चाहें तो डालें
  • थोड़ा गेहूँ का आटा – वैकल्पिक रोटी बेलना आसान हो जाता है
  • घी या मक्खन – रोटी पर लगाने के लिए

Instructions
 

सबसे पहले पत्तों की सफाई और तैयारी

  • भाई, सरसों का साग बनाते समय सबसे बड़ा काम होता है पत्ते साफ करना।
  • सरसों, पालक, बथुआ—जो भी इस्तेमाल कर रहे हो—सबको अच्छे से छाँटकर अलग कर लो।
  • कई बार पत्तों में मिट्टी और छोटे-छोटे डंठल फँसे रहते हैं, इसलिए 2–3 बार साफ पानी से धो लो।
  • ठंड के मौसम में पत्तों पर ओस जमा रहती है, इसलिए धोने के बाद हल्का सा झाड़कर टोकरी में फैला दो।
  • काटने का तरीका बहुत महीन नहीं रखना।
  • देसी साग मोटा-मोटा ही अच्छा लगता है।
  • दादी-नानी तो हाथ से ही तोड़ती थीं, चाकू की ज़रूरत ही नहीं।
  • अगर आप चाकू से काट रहे हो, तो भी बहुत बारीक मत कटना—वरना पकाते समय पेस्ट जैसा हो जाता है।

बड़े भगोने में पत्ते उबालना

  • अब एक बड़ा सा भगोना (या कुकर भी चलेगा) ले लो।
  • उसमें सारे पत्ते डाल दो।
  • थोड़ा सा पानी डालो—बहुत ज़्यादा नहीं, क्योंकि पत्ते खुद भी पानी छोड़ते हैं।
  • आँच मध्यम रखो और पत्तों को पकने दो।
  • पहले सरसों और बथुआ पकने में समय लेते हैं, पालक जल्दी पक जाता है।
  • अगर चाहो तो पहले सरसों-बथुआ डालकर 10 मिनट बाद पालक डाल सकते हो।
  • लेकिन एक साथ भी डाल दो तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
  • धीरे-धीरे जैसे-जैसे पत्ते गलने लगेंगे, एक अलग ही खुश्बू आएगी।
  • पकाते वक्त बीच-बीच में चलाते रहना।
  • ये काम थोड़ा धीमा होता है, करीब 25–30 मिनट लग जाते हैं।
  • देसी स्टाइल में तो लोग 40–45 मिनट तक पकाते हैं—स्वाद और बढ़ जाता है।

पके हुए साग को कूटना

  • जब पत्ते अच्छे से नरम हो जाएँ, तब गैस बंद करो और इसे थोड़ा ठंडा होने दो।
  • अब आता है देसी तरीका—कूटना।
  • भाई, पुराने ज़माने में लकड़ी का मूसल होता था, उसी से कूटते थे।
  • आजकल लोग मिक्सर का शॉर्टकट लेते हैं, पर मिक्सर में पेस्ट बन जाता है और देसी टेक्सचर खत्म हो जाता है।
  • अगर समय हो और मन करे, तो बड़े चम्मच से या मूसल से ही कूटो।
  • मकई का थोड़ा सा आटा (2–3 चम्मच) डालकर कूटो तो साग हल्का गाढ़ा और मज़ेदार बनता है।
  • मिक्सर का इस्तेमाल करना पड़े, तो सिर्फ 1–2 पल्स दो—ज्यादा बिलकुल नहीं।

अब करते हैं असली काम – तड़का

  • साग का पूरा स्वाद तड़के पर ही टिकता है।
  • अगर तड़का अच्छा, तो साग लाजवाब।
  • एक पैन लो और उसमें 2–3 चम्मच घी डालो।
  • घी थोड़ा गरम हो जाए तो एक चुटकी हींग डाल दो।
  • इससे सुगंध किचन में फैलने लगेगी।
  • अब इसमें बारीक कटा प्याज़ डालो।
  • हल्का सुनहरा होने तक भूनो।
  • फिर कुटी हुई लहसुन की कलियाँ डाल दो—6–7 कलियाँ काफी हैं।
  • लहसुन जब हल्का भूरा होने लगे, तभी कटी हरी मिर्च डालो।
  • टमाटर डालने पर हल्की खटास आती है, जो साग को संतुलित करती है।
  • 1–2 टमाटर काफी हैं।
  • इन्हें भूनते रहो जबतक मिश्रण थोड़ा नरम न हो जाए।
  • अब यह पूरा तड़का बड़े भगोने में पड़े साग में डाल दो।
  • अच्छी तरह मिलाओ।
  • फिर 10–12 मिनट धीमी आँच पर पकने दो।
  • यहीं से असली देहाती खुश्बू आती है—जिसे कोई रेस्तराँ कॉपी नहीं कर सकता।

साग को धीमी आँच पर बैठाना (सबसे जरूरी स्टेप)

  • भाई, साग का राज़ सिर्फ सामग्री नहीं… इसकी धीमी कुकिंग है।
  • जब तड़का डालकर साग मिला दिया जाए, तब 10 मिनट तक ढककर पकाओ।
  • बीच-बीच में चलाते रहना क्योंकि अगर नीचे लग गया तो कड़वापन आ जाता है।
  • धीमी आँच पर पकाने से साग “सेटल” होता है—मतलब उसमें सारी खुश्बू और स्वाद एकसाथ बंध जाते हैं।
  • यही वजह है कि देहाती घरों में साग हमेशा आलस से, आराम से, धीमी आँच में पकाया जाता है।
  • सोचो भाई… आग धीमी… भगोना भरा हुआ… घी की महक… और सर्दी का मौसम…
  • बस, पूरा मज़ा इसी में है।

अब आता है मक्के की रोटी बनाने का हिस्सा

  • यह थोड़ा टेक्निकल होता है, पर एक बार तरीका समझ आ जाए तो आसान।

आटा गूँथना

  • 2 कप मक्के का आटा लो।
  • उसमें एक चुटकी नमक डाल दो।
  • अब गुनगुने पानी से धीरे-धीरे गूँथो।
  • मक्के का आटा गेहूँ की तरह बंधता नहीं, इसलिए आटा बहुत ज़्यादा सख्त नहीं बनाना।
  • थोड़ा नरम आटा ही रोटी अच्छी बनाता है।
  • अगर बिलकुल नहीं बंध रहा, तो बस 1 छोटा चम्मच गेहूँ का आटा मिला सकते हो—पर ज़्यादा नहीं।

रोटी बेलने का देसी तरीका

  • मक्के की रोटी बेलना थोड़ा मुश्किल होता है।
  • अगर सीधे बेलन से बेलोगे तो अक्सर फट जाती है।
  • इसका सबसे आसान तरीका है:
  • एक पॉलिथीन या प्लास्टिक शीट लो
  • उस पर थोड़ी सूखी मैदा या मक्के का आटा छिड़को
  • आटे की लोई रखो
  • अब हाथ से धीरे-धीरे थपथपाकर फैलाओ
  • रोटी जितनी पतली चाहो उतनी बना लो, बस ध्यान रहे कि किनारे बहुत पतले न हों वरना टूट जाएगी।

तवे पर सेंकना

  • तवा गर्म होना चाहिए, पर बहुत ज्यादा भी नहीं।
  • रोटी को हल्के हाथ से उठाओ और तवे पर रखो।
  • पहली तरफ थोड़ी देर पकाओ, फिर पलट दो।
  • दोनों तरफ से हल्का-हल्का दबाकर सेंको।
  • अगर चूल्हे की आग होती तो मज़ा दोगुना होता।
  • रोटी फूल जाती है, और ऊपर से देसी घी लगा दो तो बस… पूरा लंगर वाला स्वाद आ जाता है।

आखिर में परोसना (सबसे मजेदार हिस्सा)

  • साग को कटोरी में डालो।
  • ऊपर से थोड़ा सा गरम घी डाल दो—बस इतना कि खुश्बू आए।
  • रोटी को गरम-गरम परोसो।
  • अगर सफेद मक्खन मिल जाए तो उसके साथ और भी मज़ेदार।
  • कुछ लोग साथ में गुड़ भी खाते हैं।
  • कुछ लोग छाछ।
  • और कुछ लोग प्याज के टुकड़े साथ में लेते हैं।
  • आप अपनी पसंद से खाओ—हर तरीका सही है।

एक छोटी सी घरेलू टिप

  • भाई, साग को अगर अगले दिन खाओ तो और भी स्वादिष्ट लगता है।
  • क्योंकि रातभर में वह पूरा बैठ जाता है और मसाले अच्छे से घुल जाते हैं।
  • घर में जो भी बच जाए—फ्रिज में रख दो—अगले दिन गरम करके खाओ… मज़ा दोगुना।
Keyword सरसों का साग और मक्के की रोटी