“दाल बाटी चूरमा रेसिपी क्यों है इतना पौष्टिक? जानें हेल्थ बेनिफिट्स, न्यूट्रिशन चार्ट, प्रोटीन व फाइबर लाभ और घर पर रेसिपी बनाने का आसान तरीका।”
दाल बाटी चूरमा रेसिपी का परिचय
दाल बाटी चूरमा रेसिपी राजस्थान का एक पारंपरिक और शाही व्यंजन है, जिसे उसके बेहतरीन स्वाद, पौष्टिकता और देसी अंदाज़ के लिए जाना जाता है। यह व्यंजन तीन भागों—दाल, बाटी और चूरमा—से मिलकर बनता है, इसलिए इसे “दाल-बाटी-चूरमा” रेसिपी कहा जाता है। दाल में पाँच तरह की दालों का उपयोग होता है, बाटी गेहूं के आटे से बनाई जाती है और देसी घी में डुबोकर परोसी जाती है, जबकि चूरमा मीठे स्वाद वाला व्यंजन है जिसे घी, गुड़/चीनी और सूखे मेवों के साथ तैयार किया जाता है।
राजस्थानी इतिहास में यह व्यंजन वीरों, योद्धाओं और राजपूतों का प्रिय भोजन माना जाता था, क्योंकि यह ऊर्जा-युक्त है और यात्रा या युद्ध के दौरान आसानी से तैयार किया जा सकता था। आज यह राजस्थान के हर घर, शादी-समारोह और त्योहारों खासकर तीज, गणगौर, और होली में खास तौर पर बनाया जाता है।
दाल बाटी चूरमा रेसिपी सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति, मेहमाननवाज़ी और परंपरा का प्रतीक है। बाटी पर घी डालते ही इसकी खुशबू पूरे माहौल को देसी राजस्थान से भर देती है। यही वजह है कि आज यह पूरे भारत में और विदेशों में भी बेहद लोकप्रिय हो चुका है।
दाल बाटी चूरमा रेसिपी का इतिहास
दाल बाटी चूरमा रेसिपी का इतिहास राजस्थान की वीर भूमि, राजपूत संस्कृति और शौर्य गाथाओं से जुड़ा हुआ है। यह व्यंजन सदियों पुराना है और माना जाता है कि इसकी शुरुआत राजपूत योद्धाओं के समय हुई, जब लंबे युद्ध और यात्राओं के दौरान सैनिकों को ऐसा भोजन चाहिए था जो
1. जल्दी तैयार हो सके,
2. लंबे समय तक खराब न हो,
3. शारीरिक ऊर्जा प्रदान करे।
1. राजपूत काल में जन्म
राजस्थान के राजपूत सैनिक युद्ध पर निकलने से पहले बाटी को आधा-पका कर रेत में दबा देते थे। रेत में गर्मी बनाए रहने के कारण बाटी धीरे-धीरे पूरी तरह पक जाती थी।
जब सैनिक लौटते, तो उस पक चुकी बाटी को निकालकर घी में डुबोकर खाते थे।
इस प्रकार बाटी एक सर्वाइव-फूड थी—कम पानी में, कम समय में तैयार होने वाला मजबूत भोजन।
2. दाल का विकास – पंचमैल दाल
राजस्थान में पानी की कमी के कारण लोग प्रोटीन के लिए दालों पर निर्भर थे। धीरे-धीरे कई दालों को मिलाकर “पंचमेल दाल” बनाई जाने लगी, जो ज्यादा पौष्टिक और लंबे समय तक पेट भरा रखने वाली है।
यह दाल सैनिकों और किसानों दोनों की पसंद बनी।
3. चूरमा का निर्माण – गलती से बना मीठा व्यंजन
चूरमा के बारे में मान्यता है कि एक बार एक राजपूत स्त्री ने गलती से चीनी/गुड़ और घी को टूटे हुए बाटियों में मिला दिया।
इससे एक मीठा, सुगंधित मिश्रण बना जिसे लोग पसंद करने लगे।
धीरे-धीरे यह “चूरमा” के नाम से प्रसिद्ध हुआ और बाद में दाल और बाटी के साथ परोसा जाने लगा।
4. किसानों और मजदूरों का भोजन बना
राजस्थान के किसान खेतों में मेहनत करते थे और उन्हें ऊर्जावान भोजन चाहिए होता था।
दाल बाटी चूरमा रेसिपी घी से भरपूर और भरपेट भोजन था, जो लंबे समय तक ऊर्जा देता था।
इस वजह से यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़ का खाना बन गया।
5. राजपरिवारों की थाली में शामिल
राजपूताना के राजाओं और रानियों ने इस व्यंजन को अपने राजसी भोज में जगह दी।
धीरे-धीरे दाल बाटी चूरमा रेसिपी एक शाही व्यंजन बन गया, जिसे त्योहारों और बड़े आयोजनों में परोसा जाने लगा।
6. राजस्थान से पूरे भारत में प्रसार
समय के साथ राजस्थानी कार्यशैली, प्रवास, और पर्यटन के कारण यह व्यंजन पूरे उत्तर भारत—
राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश
में फैल गया और आज भारत के हर बड़े शहर में लोकप्रिय है।
विदेशों में बसे भारतीयों के कारण यह आज एक ग्लोबल ट्रेंडिंग इंडियन डिश बन चुका है।
दाल बाटी चूरमा रेसिपी– Ingredients (सामग्री)
1. दाल के लिए सामग्री
(4–5 लोगों के लिए)
दालें
तूर दाल – ½ कप
मूंग दाल – ¼ कप
चना दाल – ¼ कप
मसूर दाल – ¼ कप
उड़द दाल – 2 टेबलस्पून
पानी – 3–4 कप (दाल उबालने के लिए)
तड़का
घी – 2–3 टेबलस्पून
जीरा – 1 टीस्पून
हींग – 1 चुटकी
साबुत लाल मिर्च – 2
हरी मिर्च बारीक कटी – 2
अदरक पेस्ट – 1 टीस्पून
लहसुन पेस्ट – 1 टीस्पून (optional)
प्याज बारीक कटा – ½ कप
टमाटर बारीक कटा – ½ कप
मसाले
हल्दी – ½ टीस्पून
लाल मिर्च पाउडर – 1 टीस्पून
धनिया पाउडर – 1 टीस्पून
गरम मसाला – ½ टीस्पून
नमक – स्वादानुसार
हरा धनिया – सजावट के लिए
2. बाटी के लिए सामग्री
(8–10 बाटी के लिए)
गेहूं का आटा – 2 कप
सूजी (रवा) – ½ कप
घी – 4–5 टेबलस्पून
नमक – 1 टीस्पून
अजवाइन – ½ टीस्पून
पानी – आटा गूंथने के लिए
घी – बाटी डुबाने के लिए (कम से कम ½ कप)
—
3. चूरमा के लिए सामग्री
बेसिक चूरमा
टूटी हुई पकी बाटी – 4
घी – 4–5 टेबलस्पून
पिसी चीनी या गुड़ का पाउडर – ½ कप
इलायची पाउडर – ½ टीस्पून
Dry Fruits (Optional but recommended)
बादाम कटे – 2 टेबलस्पून
काजू कटे – 2 टेबलस्पून
किशमिश – 1 टेबलस्पून
पिस्ता – 1 टेबलस्पून
दाल बाटी चूरमा —बनाने की विधि –
भाग 1 दाल बाटी चूरमा रेसिपी — तैयारी (Prep, 15–20 मिनट + दाल सोखना ऑप्शनल)
1. सामग्री तैयार रखें — ऊपर बताई गई मात्रा के अनुसार दालें, आटा, घी, मसाले आदि निकाल लें।
2. दालें (अगर चाहें तो): दालों को 30 मिनट के लिए पानी में भिगो दें — इससे दाल जल्दी गलती और दाल नरम बनती है। (अनिवार्य नहीं पर सुझाव है)
3. ओवन/तंदूर/चूल्हा सेट करें — अगर ओवन यूज़ कर रहे हैं तो 200°C (400°F) प्रीहीट करें। पारंपरिक तरीके से अगर कोयला/चूल्हा है तो पहले आग तैयार रखें।
भाग 2 — दाल बनाना –— Step-by-step
सामग्री
तूर, मूंग, चना, मसूर, उड़द — कुल लगभग 1.25–1.5 कप मिश्रित
पानी 3–4 कप, नमक, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर
घी 2–3 टेबलस्पून, जीरा, हींग, लहसुन/अदरक, प्याज, टमाटर, हरी मिर्च
विधि
1. दाल उबालें: एक प्रेशर कुकर/पॉट में सभी दालें डालें। इसमें 3–4 कप पानी और ½ टीस्पून हल्दी डालें। अगर भिगोई थीं तो 2–3 सीटी लगेंगी; नहीं तो 4–5 सीटी। (सामान्य पॉट में: 30–40 मिनट तक धीमी आँच पर उबालें)
2. दाल मसलें: दाल अच्छी तरह से गल जाए और क्रीमी हो जाए। आवश्यकता अनुसार और पानी डालकर कंसिस्टेंसी मध्यम रखें — न ज्यादा पतली न ज्यादा गाढ़ी।
3. तड़का (Tempering): कड़ाही में 2–3 टेबलस्पून घी गरम करें। जीरा चटकाएँ, हींग छिड़कें, साबुत लाल मिर्च डालें। अब बारीक कटी प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें। लहसुन/अदरक पेस्ट मिलाएँ, फिर कटे टमाटर डालकर मसाले (धनिया पाउडर, लाल मिर्च) डालकर तेल छोड़े तक भूनें।
4. दाल में मिलाना: तड़के को उबली हुई दाल में डालें। नमक समायोजित करें। 5–7 मिनट धीमी आँच पर उबालें ताकि स्वाद अच्छे से मिल जाएँ। अंत में 1/2 टीस्पून गरम मसाला और कटा हरा धनिया डालकर बंद करें।
5. फिनिशिंग: सर्व करने से पहले ऊपर से 1 टीस्पून घी डालें — पारंपरिक स्वाद के लिए ज़रूरी है।
टिप: दाल को थोड़ा पतला रखें (थोड़ा सूप जैसा) क्योंकि बाटी के साथ यह बेहतरीन लगता है। यदि चाहें तो दाल में गुड़/खीरे का हल्का स्वाद देना पसंदीदा है—पर पारंपरिक में नहीं।
भाग 3 — बाटी बनाना (Baati) — Step-by-step (सबसे महत्वपूर्ण)
सामग्री रिमाइंडर
गेहूं का आटा 2 कप, सूजी ½ कप, घी 4–5 टेबलस्पून, नमक, अजवाइन, पानी
विधि
1. आटा गूँथना: एक बड़े बाउल में गेहूं का आटा + सूजी + नमक + अजवाइन डालें। ऊपर से 4 टेबलस्पून घी डालकर अच्छी तरह मसलें (घी को आटे में अच्छे से मिलाएँ) — इससे थोड़़ा ब्रेड़ी टेक्सचर आएगा। धीरे-धीरे पानी डालकर सख्त लेकिन गूंथे जाने पर नरम आटा तैयार करें (10 मिनट)। आटे को 15 मिनट ढक कर रख दें।
2. बाटी बनाना: आटे की बराबर लोइयां बनाएँ (आलू-समोसे जितना साइज) — सामान्यतः 8–10 बाटी बनती हैं। प्रति बाटी ~60–70 ग्राम आटा। लोई को गोल करके बीच में हल्का दबाकर ठोस गोला बनाएं। किनारों को चिकना रखें।
3. पारंपरिक बेकिंग तरीके:
ओवन में: प्रीहीट 200°C पर — बाटियों को बेकिंग ट्रे पर रखें और 25–30 मिनट तक बेक करें; बीच-बीच में निकालकर घी से ब्रश करें और पलट दें ताकि चारों तरफ सुनहरा हो जाए। आख़िर में 5 मिनट ग्रिल पर चलाकर क्रिस्पी करने से असर बढ़ता है।
तंदूर / चूल्हा / कोयला: अगर तंदूर/कोयला है तो बाटियों को सीधे आग के करीब या रेत/एश में डुबाकर पकाना पारंपरिक स्वाद देता है — इसमे बाहर कुरकुरी और अंदर नरम रहती हैं।
स्टोव-टॉप (अगर ओवन नहीं): कड़ाही में हल्का सा घी गरम करें, बाटी रखें और ढक्कन ढककर धीमी आँच पर 20–25 मिनट सेकें—बीच-बीच में घी लगाते रहें और पलटते रहें।
4. अंदर से चेक: बाटी को बीच में दबाकर देखें — अगर अंदर से नरम और बाहर से ठोस/कुरकुरा है तो तैयार हैं।
5. बाटी को घी में डुबोना: जैसे ही बाटी गरम हों, उन्हें गहरे कटोरे में रखे घी (गर्म) में तुरंत डुबो दें ताकि घी अंदर तक पहुँच जाए — पारंपरिक स्वाद के लिए यह ज़रूरी है। यह स्टेप “घी का नहाना” कहलाता है।
6. ठानना: घी में डुबोने के बाद 5 मिनट रेस्ट दें ताकि घी अंदर समा जाए।
टिप्स:
अगर बाहर कुरकुरा चाहें तो बेकिंग के बाद थोडा ग्रिलिंग करें।
बाटी का साइज और घी की मात्रा आपकी पसंद पर निर्भर — त्योहारों में अधिक घी इस्तेमाल किया जाता है।
भाग 4 — चूरमा (Churma) बनाना — Step-by-step (मीठा भाग)
सामग्री रिमाइंडर
टूटी हुई बाटी (या ताजी बाटी ब्रेडक्रम्ब्स), घी, चीनी/गुड़ पाउडर, इलायची, कटे मेवे
विधि (दो वैरिएंट)
A) पारंपरिक चूरमा (बारीक पीसकर)
1. बाटी तोड़ना: 3–4 पकी हुई बाटियों को छोटे टुकड़ों में तोड़ लें।
2. रूखी भूनना (optional): कड़ाही में 1–2 टेबलस्पून घी गरम कर के टूटे हुए टुकड़ों को हल्का ब्राउन होने तक 3–4 मिनट भून लें — इससे खुशबू बढ़ेगी।
3. पीसना: अब इन्हें मिक्सर/चक्की में डालकर बारीक पीस लें — ध्यान रखें कि बहुत महीन पाउडर न बनें; थोड़ा दाना-पोरा texture अच्छा लगता है।
4. मिश्रण: एक बाउल में पीसा हुआ चूरमा लें, उसमें 3–4 टेबलस्पून घी और ½ कप पिसी चीनी (स्वाद अनुसार) मिलाएँ। इलायची पाउडर ½ टीस्पून और कटे हुए मेवे डालें। अच्छी तरह मिलाएँ — अगर मिश्रण सूखा लगे तो थोड़ा और घी डालें ताकि थोड़ी नमी और richness आए।
5. गोल बनाना (optional): चाहें तो चूरमा को छोटी गेंदों की तरह गूँथ कर सर्व कर सकते हैं या ढीला-बिखरा रख सकते हैं।
B) त्वरित चूरमा (यदि बाटी पहले से नहीं टूटी हुई)
बाजार का ब्रेड क्रम्ब या घर पर ब्रेड के टुकड़े लेकर ऊपर की तरह कर सकते हैं — पर असली स्वाद के लिए बाटी से बने चूरमा सर्वोत्तम है।
टिप: गुड़ का इस्तेमाल करने पर गुड़ को पहले कुटकर पाउडर कर लें और फिर घी के साथ मिलाएँ — गुड़ से चूरमा की मिठास और पारंपरिक स्वाद और बढ़ जाता है।
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भाग 5 दाल बाटी चूरमा रेसिपी — सर्विंग और परोसने का तरीका
1. थाली सेटिंग: सबसे पहले एक थाली में गरम दाल रखें। दाल के बगल में 2–3 बाटी सर्व करें। चूरमा को छोटे कटोरे में रखें।
2. घी डालकर परोसें: दाल पर ऊपर से 1 चम्मच घी डालें। बाटी पर पहले से घी डूबा हुआ होगा — पर चाहें तो अतिरिक्त घी सर्विंग के समय दें।
3. तड़का/हरी चटनी (optional): कुछ लोग दाल में हरा धनिया व नींबू डालकर पसंद करते हैं। साथ में अबाउट 1 कटोरी अकेला ग्रीन चटनी भी दे सकते हैं।
4. साझा करने का रीति: पारंपरिक रूप से दाल-बाटी-चूरमा को बड़े आयोजनों में परिवार मिलकर खाते हैं — बाटी को तोड़कर दाल में डुबोकर और फिर चूरमा के साथ लेते हैं।
भाग 6 दाल बाटी चूरमा रेसिपी — वैरिएंट्स, टिप्स और फोकस्ड सुझाव
वैरिएंट्स
सब्जी वाली बाटी: आधा-आधा आलू/पनीर भर के बाटी भी बनाते हैं (regional variation)।
मसालेदार दाल: ज्यादा तीखा/मसालेदार पसंद हो तो तड़के में लाल मिर्च और गरम मसाला बढ़ाएँ।
हेल्दी वर्जन: घी कम करके ओवन में बेक करें और चूरमा में चीनी कम रखें—पर स्वाद अलग आएगा।
उपयोगी टिप्स
दाल थोड़ी पतली रखें — बाटी में घी के साथ यह बहुत अच्छा लगता है।
बाटी का आटा पहले से गूँथ लें और फ्रिज में स्टोर कर 1–2 दिन में उपयोग कर सकते हैं।
अगर चाहें तो बाटी गैस पर सिकाकर ऊपर से थोड़ा कोयले का धुंआ देकर smoky flavour दे सकते हैं।
चूरमा में मेवे अधिक डालने से richness बढ़ती है — त्योहारों में यह लोकप्रिय होता है।
भाग 7 दाल बाटी चूरमा रेसिपी — स्टोरेज और रिहीटिंग
दाल: फ्रिज में एयरटाइट कंटेनर में 2–3 दिन सुरक्षित। फिर गरम करके खाएँ।
बाटी: फ्रिज में 3–4 दिन; रिहीट करने के लिए ओवन 180°C पर 8–10 मिनट रखें या एअर फ्रायर में 5–6 मिनट—ताकि बाहर क्रिस्पी और अंदर नरम रहे। घी दुबारा लगाने से बेहतर स्वाद आएगा।
चूरमा: एयरटाइट में 7–10 दिन तक रहता है (घी और चीनी के कारण)।
यहाँ दाल बाटी चूरमा रेसिपी के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits) और पोषण चार्ट (Nutrition Chart) विस्तृत रूप में दिया गया है।

दाल बाटी चूरमा रेसिपी
Equipment
- दाल बाटी चूरमा रेसिपी
Ingredients
दाल के लिए सामग्री
- 4–5 लोगों के लिए
- दालें
- तूर दाल – ½ कप
- मूंग दाल – ¼ कप
- चना दाल – ¼ कप
- मसूर दाल – ¼ कप
- उड़द दाल – 2 टेबलस्पून
- पानी – 3–4 कप दाल उबालने के लिए
तड़का
- घी – 2–3 टेबलस्पून
- जीरा – 1 टीस्पून
- हींग – 1 चुटकी
- साबुत लाल मिर्च – 2
- हरी मिर्च बारीक कटी – 2
- अदरक पेस्ट – 1 टीस्पून
- लहसुन पेस्ट – 1 टीस्पून optional
- प्याज बारीक कटा – ½ कप
- टमाटर बारीक कटा – ½ कप
मसाले
- हल्दी – ½ टीस्पून
- लाल मिर्च पाउडर – 1 टीस्पून
- धनिया पाउडर – 1 टीस्पून
- गरम मसाला – ½ टीस्पून
- नमक – स्वादानुसार
- हरा धनिया – सजावट के लिए
बाटी के लिए सामग्री
- 8–10 बाटी के लिए
- गेहूं का आटा – 2 कप
- सूजी रवा – ½ कप
- घी – 4–5 टेबलस्पून
- नमक – 1 टीस्पून
- अजवाइन – ½ टीस्पून
- पानी – आटा गूंथने के लिए
- घी – बाटी डुबाने के लिए कम से कम ½ कप
- —
चूरमा के लिए सामग्री
- बेसिक चूरमा
- टूटी हुई पकी बाटी – 4
- घी – 4–5 टेबलस्पून
- पिसी चीनी या गुड़ का पाउडर – ½ कप
- इलायची पाउडर – ½ टीस्पून
Dry Fruits (Optional but recommended)
- बादाम कटे – 2 टेबलस्पून
- काजू कटे – 2 टेबलस्पून
- किशमिश – 1 टेबलस्पून
- पिस्ता – 1 टेबलस्पून
Instructions
भाग 1 दाल बाटी चूरमा रेसिपी — तैयारी (Prep, 15–20 मिनट + दाल सोखना ऑप्शनल)
- सामग्री तैयार रखें — ऊपर बताई गई मात्रा के अनुसार दालें, आटा, घी, मसाले आदि निकाल लें।
- दालें (अगर चाहें तो): दालों को 30 मिनट के लिए पानी में भिगो दें — इससे दाल जल्दी गलती और दाल नरम बनती है। (अनिवार्य नहीं पर सुझाव है)
- ओवन/तंदूर/चूल्हा सेट करें — अगर ओवन यूज़ कर रहे हैं तो 200°C (400°F) प्रीहीट करें। पारंपरिक तरीके से अगर कोयला/चूल्हा है तो पहले आग तैयार रखें।
भाग 2 — दाल बनाना –— Step-by-step
- सामग्री
- तूर, मूंग, चना, मसूर, उड़द — कुल लगभग 1.25–1.5 कप मिश्रित
- पानी 3–4 कप, नमक, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर
- घी 2–3 टेबलस्पून, जीरा, हींग, लहसुन/अदरक, प्याज, टमाटर, हरी मिर्च
- विधि
- दाल उबालें: एक प्रेशर कुकर/पॉट में सभी दालें डालें। इसमें 3–4 कप पानी और ½ टीस्पून हल्दी डालें। अगर भिगोई थीं तो 2–3 सीटी लगेंगी; नहीं तो 4–5 सीटी। (सामान्य पॉट में: 30–40 मिनट तक धीमी आँच पर उबालें)
- दाल मसलें: दाल अच्छी तरह से गल जाए और क्रीमी हो जाए। आवश्यकता अनुसार और पानी डालकर कंसिस्टेंसी मध्यम रखें — न ज्यादा पतली न ज्यादा गाढ़ी।
- तड़का (Tempering): कड़ाही में 2–3 टेबलस्पून घी गरम करें। जीरा चटकाएँ, हींग छिड़कें, साबुत लाल मिर्च डालें। अब बारीक कटी प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें। लहसुन/अदरक पेस्ट मिलाएँ, फिर कटे टमाटर डालकर मसाले (धनिया पाउडर, लाल मिर्च) डालकर तेल छोड़े तक भूनें।
- दाल में मिलाना: तड़के को उबली हुई दाल में डालें। नमक समायोजित करें। 5–7 मिनट धीमी आँच पर उबालें ताकि स्वाद अच्छे से मिल जाएँ। अंत में 1/2 टीस्पून गरम मसाला और कटा हरा धनिया डालकर बंद करें।
- फिनिशिंग: सर्व करने से पहले ऊपर से 1 टीस्पून घी डालें — पारंपरिक स्वाद के लिए ज़रूरी है।
- टिप: दाल को थोड़ा पतला रखें (थोड़ा सूप जैसा) क्योंकि बाटी के साथ यह बेहतरीन लगता है। यदि चाहें तो दाल में गुड़/खीरे का हल्का स्वाद देना पसंदीदा है—पर पारंपरिक में नहीं।
भाग 3 — बाटी बनाना (Baati) — Step-by-step (सबसे महत्वपूर्ण)
- सामग्री रिमाइंडर
- गेहूं का आटा 2 कप, सूजी ½ कप, घी 4–5 टेबलस्पून, नमक, अजवाइन, पानी
- विधि
- आटा गूँथना: एक बड़े बाउल में गेहूं का आटा + सूजी + नमक + अजवाइन डालें। ऊपर से 4 टेबलस्पून घी डालकर अच्छी तरह मसलें (घी को आटे में अच्छे से मिलाएँ) — इससे थोड़़ा ब्रेड़ी टेक्सचर आएगा। धीरे-धीरे पानी डालकर सख्त लेकिन गूंथे जाने पर नरम आटा तैयार करें (10 मिनट)। आटे को 15 मिनट ढक कर रख दें।
- बाटी बनाना: आटे की बराबर लोइयां बनाएँ (आलू-समोसे जितना साइज) — सामान्यतः 8–10 बाटी बनती हैं। प्रति बाटी ~60–70 ग्राम आटा। लोई को गोल करके बीच में हल्का दबाकर ठोस गोला बनाएं। किनारों को चिकना रखें।
- पारंपरिक बेकिंग तरीके:
- ओवन में: प्रीहीट 200°C पर — बाटियों को बेकिंग ट्रे पर रखें और 25–30 मिनट तक बेक करें; बीच-बीच में निकालकर घी से ब्रश करें और पलट दें ताकि चारों तरफ सुनहरा हो जाए। आख़िर में 5 मिनट ग्रिल पर चलाकर क्रिस्पी करने से असर बढ़ता है।
- तंदूर / चूल्हा / कोयला: अगर तंदूर/कोयला है तो बाटियों को सीधे आग के करीब या रेत/एश में डुबाकर पकाना पारंपरिक स्वाद देता है — इसमे बाहर कुरकुरी और अंदर नरम रहती हैं।
- स्टोव-टॉप (अगर ओवन नहीं): कड़ाही में हल्का सा घी गरम करें, बाटी रखें और ढक्कन ढककर धीमी आँच पर 20–25 मिनट सेकें—बीच-बीच में घी लगाते रहें और पलटते रहें।
- अंदर से चेक: बाटी को बीच में दबाकर देखें — अगर अंदर से नरम और बाहर से ठोस/कुरकुरा है तो तैयार हैं।
- बाटी को घी में डुबोना: जैसे ही बाटी गरम हों, उन्हें गहरे कटोरे में रखे घी (गर्म) में तुरंत डुबो दें ताकि घी अंदर तक पहुँच जाए — पारंपरिक स्वाद के लिए यह ज़रूरी है। यह स्टेप “घी का नहाना” कहलाता है।
- ठानना: घी में डुबोने के बाद 5 मिनट रेस्ट दें ताकि घी अंदर समा जाए।
- टिप्स:
- अगर बाहर कुरकुरा चाहें तो बेकिंग के बाद थोडा ग्रिलिंग करें।
- बाटी का साइज और घी की मात्रा आपकी पसंद पर निर्भर — त्योहारों में अधिक घी इस्तेमाल किया जाता है।
भाग 4 — चूरमा (Churma) बनाना — Step-by-step (मीठा भाग)
- सामग्री रिमाइंडर
- टूटी हुई बाटी (या ताजी बाटी ब्रेडक्रम्ब्स), घी, चीनी/गुड़ पाउडर, इलायची, कटे मेवे
- विधि (दो वैरिएंट)
- A) पारंपरिक चूरमा (बारीक पीसकर)
- बाटी तोड़ना: 3–4 पकी हुई बाटियों को छोटे टुकड़ों में तोड़ लें।
- रूखी भूनना (optional): कड़ाही में 1–2 टेबलस्पून घी गरम कर के टूटे हुए टुकड़ों को हल्का ब्राउन होने तक 3–4 मिनट भून लें — इससे खुशबू बढ़ेगी।
- पीसना: अब इन्हें मिक्सर/चक्की में डालकर बारीक पीस लें — ध्यान रखें कि बहुत महीन पाउडर न बनें; थोड़ा दाना-पोरा texture अच्छा लगता है।
- मिश्रण: एक बाउल में पीसा हुआ चूरमा लें, उसमें 3–4 टेबलस्पून घी और ½ कप पिसी चीनी (स्वाद अनुसार) मिलाएँ। इलायची पाउडर ½ टीस्पून और कटे हुए मेवे डालें। अच्छी तरह मिलाएँ — अगर मिश्रण सूखा लगे तो थोड़ा और घी डालें ताकि थोड़ी नमी और richness आए।
- गोल बनाना (optional): चाहें तो चूरमा को छोटी गेंदों की तरह गूँथ कर सर्व कर सकते हैं या ढीला-बिखरा रख सकते हैं।
- B) त्वरित चूरमा (यदि बाटी पहले से नहीं टूटी हुई)
- बाजार का ब्रेड क्रम्ब या घर पर ब्रेड के टुकड़े लेकर ऊपर की तरह कर सकते हैं — पर असली स्वाद के लिए बाटी से बने चूरमा सर्वोत्तम है।
- टिप: गुड़ का इस्तेमाल करने पर गुड़ को पहले कुटकर पाउडर कर लें और फिर घी के साथ मिलाएँ — गुड़ से चूरमा की मिठास और पारंपरिक स्वाद और बढ़ जाता है।
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भाग 5 दाल बाटी चूरमा रेसिपी — सर्विंग और परोसने का तरीका
- थाली सेटिंग: सबसे पहले एक थाली में गरम दाल रखें। दाल के बगल में 2–3 बाटी सर्व करें। चूरमा को छोटे कटोरे में रखें।
- घी डालकर परोसें: दाल पर ऊपर से 1 चम्मच घी डालें। बाटी पर पहले से घी डूबा हुआ होगा — पर चाहें तो अतिरिक्त घी सर्विंग के समय दें।
- तड़का/हरी चटनी (optional): कुछ लोग दाल में हरा धनिया व नींबू डालकर पसंद करते हैं। साथ में अबाउट 1 कटोरी अकेला ग्रीन चटनी भी दे सकते हैं।
- साझा करने का रीति: पारंपरिक रूप से दाल-बाटी-चूरमा को बड़े आयोजनों में परिवार मिलकर खाते हैं — बाटी को तोड़कर दाल में डुबोकर और फिर चूरमा के साथ लेते हैं।
दाल बाटी चूरमा रेसिपी – स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits)
दाल बाटी चूरमा रेसिपी राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर भारत की पारंपरिक और पौष्टिक डिश है। यह सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि प्रोटीन, फाइबर, कार्ब्स और गुड फैट से भरपूर एक संपूर्ण भोजन (Complete Meal) है।
1. उच्च प्रोटीन दाल – मांसपेशियों के लिए लाभकारी
दाल (तूर + मूँग + चना दाल) में भरपूर प्रोटीन होता है।
बॉडी बिल्डिंग
वजन बढ़ाने
बच्चों की ग्रोथ
कमजोर शरीर वाले लोगों
के लिए बहुत फायदेमंद।
2. पाचन के लिए फायदेमंद (High Fiber)
बाटी गेहूं के आटे और घी से बनती है जिसमें फाइबर अधिक होता है।
यह
कब्ज
गैस
पेट फूलना
को कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है।
3. एनर्जी का पावरहाउस (High Carbohydrates)
चूरमा और बाटी मिलकर शरीर को तुरंत energy देते हैं।
किसान
मजदूर
खिलाड़ी
ज्यादा काम करने वाले लोग
इसके बाद घंटों तक energetic रहते हैं।
4. अच्छा फैट – हार्ट और दिमाग के लिए लाभकारी
घी शरीर को
अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ाता है
हार्ट को मजबूत करता है
दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाता है
शरीर की थकान दूर करता है
गाय के घी का उपयोग सबसे अधिक स्वास्थ्यवर्धक।
5. आयरन और मिनरल्स से भरपूर
दालों और गेहूं में
आयरन
पोटैशियम
मैग्नीशियम
जिंक
मौजूद होता है।
यह खून बढ़ाता है और एनीमिया से बचाता है।
6. इम्युनिटी बढ़ाता है (Rich in Antioxidants)
घी + दाल (विशेषकर मूंग दाल)
एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है, जो
संक्रमण
वायरल
थकावट
से बचाते हैं।
7. वजन बढ़ाने वालों के लिए बेस्ट
अगर कोई कमजोर है या वजन बढ़ाना चाहता है तो दाल बाटी चूरमा रेसिपी उत्तम भोजन है —
घी, दाल, गेहूं और चूरमा मिलकर कैलोरी और प्रोटीन दोनों बढ़ाते हैं।
किसे कम खाना चाहिए?
निम्नलिखित को कम मात्रा में खाना चाहिए:
मोटापा
शुगर (चूरमा मिठाई है)
फैटी लिवर
हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग (ज़्यादा घी से परहेज़ करें)
दाल बाटी चूरमा रेसिपी – पोषण चार्ट (Nutrition Chart per Serving)
(Approx. 1 serving = 2 बाटी + 1 कटोरी दाल + 1 छोटी कटोरी चूरमा)
पोषक तत्व (Nutrients) मात्रा (Approx.)
कैलोरी 650–900 kcal
प्रोटीन 18–25 g
कार्बोहाइड्रेट 80–120 g
फैट (घी सहित) 25–40 g
फाइबर 8–12 g
शुगर (चूरमा से) 8–15 g
कैल्शियम 40–70 mg
आयरन 4–7 mg
पोटैशियम 300–450 mg
मैग्नीशियम 40–60 mg
(नोट: घी और शक्कर की मात्रा के आधार पर कैलोरी ऊपर–नीचे हो सकती है।)
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भाग 8 दाल बाटी चूरमा रेसिपी — सामान्य समस्याएँ और उनके समाधान (FAQs)
- दाल बाटी चूरमा रेसिपी क्या है?
दाल बाटी चूरमा रेसिपी राजस्थान की पारंपरिक डिश है जिसमें दाल, गेहूं से बनी बाटी और मीठा चूरमा शामिल होता है।
- दाल बाटी चूरमा रेसिपी स्वस्थ क्यों माना जाता है?
दाल बाटी चूरमा रेसिपी प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कार्ब्स और घी जैसे अच्छे फैट से भरपूर होता है, इसलिए इसे पौष्टिक भोजन माना जाता है।
- दाल बाटी चूरमा रेसिपी में कितनी कैलोरी होती है?
एक सर्विंग में लगभग 650–900 कैलोरी होती है, यह दाल, घी और चूरमा की मात्रा पर निर्भर करती है।
- क्या दाल बाटी चूरमा रेसिपी वजन बढ़ाने में मदद करता है?
हाँ, इसमें स्वस्थ कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट अधिक होते हैं, इसलिए वजन बढ़ाने वालों के लिए यह अच्छा भोजन है।
- क्या डायबिटीज़ के मरीज दाल बाटी चूरमा रेसिपी खा सकते हैं?
हाँ, लेकिन चूरमा कम मात्रा में खाएँ क्योंकि उसमें शक्कर होती है। घी भी सीमित रखें।
- दाल बाटी चूरमा रेसिपी में कौन-कौन सी दालें इस्तेमाल होती हैं?
मुख्य रूप से तूर दाल, चना दाल, मूँग दाल और मसूर दाल का मिश्रण इस्तेमाल होता है।
- बाटी कितनी देर में पकती है?
तंदूर, ओवन या गैस पर पकाने पर बाटी को 25–35 मिनट लगते हैं।
- चूरमा कैसे बनाया जाता है?
पकी हुई बाटी को तोड़कर घी और शक्कर/गुड़ मिलाकर बारीक पीसकर चूरमा बनाया जाता है।
- दाल बाटी के साथ कौन-कौन सी साइड डिश अच्छी लगती है?
लहसुन की चटनी, प्याज, नींबू, कढ़ी, पापड़ और गट्टे की सब्जी इसके साथ खूब पसंद की जाती हैं।
- क्या दाल बाटी चूरमा रेसिपी रोज़ खा सकते हैं?
कभी-कभी खाना ठीक है, लेकिन रोज़ाना नहीं क्योंकि घी और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है।
बाटी अंदर से कच्ची रह गई → आटा ज्यादा नरम हो सकता है; अगली बार थोड़ा सख्त आटा गूँथें और बेकिंग टाइम बढ़ाएँ।
दाल बिखरी/बहुत पतली हो गई → थोड़ी देर उबालकर पानी घटाएँ या थोड़ी घी-सब्जी का तड़का बढ़ाएँ।
चूरमा बहुत सूखा है → थोड़ा और घी मिलाएँ।
बाटी कुरकुरी नहीं हुई → ओवन/तंदूर में ग्रिलिंग बढ़ाएँ या स्टोव पर धीमी आँच पर लंबा सेकना होगा।