“सरसों का साग और मक्के की रोटी की आसान और देसी रेसिपी जानें। इसमें सामग्री, बनाने की विधि, वैराइटी, स्वास्थ्य लाभ और न्यूट्रिशन चार्ट सब कुछ सरल भाषा में समझाया गया है। सर्दियों में बनने वाली इस पारंपरिक सरसों का साग और मक्के की रोटी का असली स्वाद घर पर कैसे पाएँ—पूरी जानकारी पढ़ें।”
सरसों का साग और मक्के की रोटी- परिचय
भाई सच बताऊँ… जैसे ही ठंड शुरू होती है ना, हमारे यहाँ सबसे पहला ख्याल सरसों का साग और मक्के की रोटी का ही आता है। मतलब ऐसा लगता है कि मौसम खुद बोल रहा है – “चलो, अब असली देसी खाना सरसों का साग और मक्के की रोटीबनाने का टाइम आ गया।”
बचपन में जब दादी सुबह-सुबह सरसों के पत्ते लेकर बैठ जाती थीं, तो मुझे पता चल जाता था कि आज घर में सरसों का साग और मक्के की रोटी बनेगा। उस वक़्त भले समझ नहीं आता था, पर अब लगता है कि वो स्वाद किसी पाँच-स्टार होटल में भी नहीं मिलता।
सरसों का साग और मक्के की रोटी… ये बस पता नहीं क्यों, एक अपनापन सा देती है।
खाना भी है और एक तरह से याद भी।
एक तरह से सुकून भी।
और हाँ—ऐसा सरसों का साग और मक्के की रोटी खाना है जिसे खाते वक्त इंसान थोड़ा धीमा हो जाता है… आराम से खाता है… महसूस करके खाता है।
यही सादगी, यही देसी स्वाद, यही मुँह से निकलने वाला “वाह” — इस सरसों का साग और मक्के की रोटी को खास बनाता है।
सरसों का साग और मक्के की रोटी –इतिहास और उत्पत्ति
देखो भाई, अब बहुत पुराना हिसाब-किताब तो किसी को नहीं पता किसरसों का साग और मक्के की रोटी पहली बार किसने बनाया था। न कोई किताब इसका ज़िक्र करती है, न कोई पक्का रिकॉर्ड मिलता है।
लेकिन एक बात पक्की है — यह सरसों का साग और मक्के की रोटी पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के गाँवों से ही निकला है।
पुराने ज़माने में लोग वही पकाते थे जो खेत में उगता था।
और सर्दियों में क्या उगता था?
सरसों…
और खेतों में खूब मक्का…सरसों का साग और मक्के की रोटी
तो बस जो मिला, उसी से बना देसी खाना।
सरसों का साग और मक्के की रोटी।
धीरे-धीरे यह सरसों का साग और मक्के की रोटी खाना खेतों की झोपड़ियों से निकलकर पूरे उत्तर भारत की रसोई में पहुँच गया।
किसानों के लिए यह ताकत देने वाला खाना था — ठंड में ऊर्जा रखता था।
और महिलाओं के लिए यह एक मौसम का त्योहार जैसा था — खेतों की खुश्बू घर तक ले आने वाला।
कह सकते हैं कि सरसों का साग और मक्के की रोटी कोई बनी-बनाई रेसिपी नहीं थी।
यह तो मिट्टी और मौसम की देन है।
सरसों जब पीले फूलों से लद जाती थी, तो लोगों को ऐसे लगता था जैसे खुद धरती कह रही हो — “सरसों का साग और मक्के की रोटी बनाओ।”
आज भी जो लोग पंजाब या हरियाणा की तरफ गए हों, वो जानते हैं कि वहाँ सरसों का खेत देख कर दिल खुद-ब-खुद खुश हो जाता है।
और शायद इसी वजह से यह सरसों का साग और मक्के की रोटी केवल खाना नहीं, एक तरह की पहचान बन गया है — पंजाब की, भारत की, देसी संस्कृति की।
INGREDIENTS
देखो भाई, सरसों का साग और मक्के की रोटी बनाने की चीज़ें बहुत भारी-भरकम नहीं होतीं।
जो एक आम घर में होता है, वही लग जाता है।
मैं नीचे बिलकुल साफ-साफ और सादी भाषा में लिख रहा हूँ ताकि किसी को भी समझ आ जाए।
सरसों का साग बनाने की सामग्री
- सरसों के पत्ते – करीब आधा किलो या जितना घर में लोग हों
- पालक – 150–200 ग्राम, इससे साग थोड़ा मुलायम बनता है
- बथुआ – एक मुट्ठी या 100–150 ग्राम, स्वाद बढ़ाता है
- अदरक – एक इंच का टुकड़ा, स्वाद भी और गर्माहट भी
- लहसुन – 6–7 कलियाँ, देसी खुश्बू के लिए
- हरी मिर्च – 2–3, अपने स्वाद के अनुसार
- प्याज़ – 1 बड़ा, बारीक काट लें
- टमाटर – 1–2, हल्की खटास के लिए
- नमक – जितना आपको ठीक लगे
- लाल मिर्च – आधा से एक चम्मच
- मकई का आटा – 2–3 चम्मच (साग गाढ़ा करने के लिए)
- घी – 2–3 चम्मच, तड़के के लिए
- हींग – एक छोटी चुटकी, चाहें तो डालें नहीं तो छोड़ दें
- थोड़ा पानी – पत्ते पकाने के लिए
मक्के की रोटी बनाने की सामग्री
- मक्के का आटा – 2 कप (जितनी रोटी चाहिए उसके हिसाब से)
- गुनगुना पानी – आटा गूँथने के लिए
- नमक – एक चुटकी, चाहें तो डालें
- थोड़ा गेहूँ का आटा – (वैकल्पिक) रोटी बेलना आसान हो जाता है
- घी या मक्खन – रोटी पर लगाने के लिए
सरसों का साग और मक्के की रोटी बनाने की विधि –
भाई देखो… सरसों का साग और मक्के की रोटी बनाना कोई बड़ी साइंस नहीं है, लेकिन हाँ, इसमें प्यार, धैर्य और थोड़ी देहाती समझ चाहिए होती है।
यह सरसों का साग और मक्के की रोटी ऐसा खाना है जो जल्दीबाज़ी में नहीं बनता।
धीमी आँच, आराम से पकाना, और बीच-बीच में हिलाते रहना—यही इसका राज़ है।
मैं यहाँ पूरी विधि एकदम सहज, रोजमर्रा की भाषा में बता रहा हूँ।
ऐसा मानो कि आप मेरे सामने बैठे हो और मैं धीरे-धीरे समझा रहा हूँ।
1. सबसे पहले पत्तों की सफाई और तैयारी
भाई, सरसों का साग बनाते समय सबसे बड़ा काम होता है पत्ते साफ करना।
सरसों, पालक, बथुआ—जो भी इस्तेमाल कर रहे हो—सबको अच्छे से छाँटकर अलग कर लो।
कई बार पत्तों में मिट्टी और छोटे-छोटे डंठल फँसे रहते हैं, इसलिए 2–3 बार साफ पानी से धो लो।
ठंड के मौसम में पत्तों पर ओस जमा रहती है, इसलिए धोने के बाद हल्का सा झाड़कर टोकरी में फैला दो।
काटने का तरीका बहुत महीन नहीं रखना।
देसी साग मोटा-मोटा ही अच्छा लगता है।
दादी-नानी तो हाथ से ही तोड़ती थीं, चाकू की ज़रूरत ही नहीं।
अगर आप चाकू से काट रहे हो, तो भी बहुत बारीक मत कटना—वरना पकाते समय पेस्ट जैसा हो जाता है।
2. बड़े भगोने में पत्ते उबालना
अब एक बड़ा सा भगोना (या कुकर भी चलेगा) ले लो।
उसमें सारे पत्ते डाल दो।
थोड़ा सा पानी डालो—बहुत ज़्यादा नहीं, क्योंकि पत्ते खुद भी पानी छोड़ते हैं।
आँच मध्यम रखो और पत्तों को पकने दो।
पहले सरसों और बथुआ पकने में समय लेते हैं, पालक जल्दी पक जाता है।
अगर चाहो तो पहले सरसों-बथुआ डालकर 10 मिनट बाद पालक डाल सकते हो।
लेकिन एक साथ भी डाल दो तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
धीरे-धीरे जैसे-जैसे पत्ते गलने लगेंगे, एक अलग ही खुश्बू आएगी।
पकाते वक्त बीच-बीच में चलाते रहना।
ये काम थोड़ा धीमा होता है, करीब 25–30 मिनट लग जाते हैं।
देसी स्टाइल में तो लोग 40–45 मिनट तक पकाते हैं—स्वाद और बढ़ जाता है।
3. पके हुए साग को कूटना
जब पत्ते अच्छे से नरम हो जाएँ, तब गैस बंद करो और इसे थोड़ा ठंडा होने दो।
अब आता है देसी तरीका—कूटना।
भाई, पुराने ज़माने में लकड़ी का मूसल होता था, उसी से कूटते थे।
आजकल लोग मिक्सर का शॉर्टकट लेते हैं, पर मिक्सर में पेस्ट बन जाता है और देसी टेक्सचर खत्म हो जाता है।
अगर समय हो और मन करे, तो बड़े चम्मच से या मूसल से ही कूटो।
मकई का थोड़ा सा आटा (2–3 चम्मच) डालकर कूटो तो साग हल्का गाढ़ा और मज़ेदार बनता है।
मिक्सर का इस्तेमाल करना पड़े, तो सिर्फ 1–2 पल्स दो—ज्यादा बिलकुल नहीं।
4. अब करते हैं असली काम – तड़का
साग का पूरा स्वाद तड़के पर ही टिकता है।
अगर तड़का अच्छा, तो साग लाजवाब।
एक पैन लो और उसमें 2–3 चम्मच घी डालो।
घी थोड़ा गरम हो जाए तो एक चुटकी हींग डाल दो।
इससे सुगंध किचन में फैलने लगेगी।
अब इसमें बारीक कटा प्याज़ डालो।
हल्का सुनहरा होने तक भूनो।
फिर कुटी हुई लहसुन की कलियाँ डाल दो—6–7 कलियाँ काफी हैं।
लहसुन जब हल्का भूरा होने लगे, तभी कटी हरी मिर्च डालो।
टमाटर डालने पर हल्की खटास आती है, जो साग को संतुलित करती है।
1–2 टमाटर काफी हैं।
इन्हें भूनते रहो जबतक मिश्रण थोड़ा नरम न हो जाए।
अब यह पूरा तड़का बड़े भगोने में पड़े साग में डाल दो।
अच्छी तरह मिलाओ।
फिर 10–12 मिनट धीमी आँच पर पकने दो।
यहीं से असली देहाती खुश्बू आती है—जिसे कोई रेस्तराँ कॉपी नहीं कर सकता।
5. साग को धीमी आँच पर बैठाना (सबसे जरूरी स्टेप)
भाई, साग का राज़ सिर्फ सामग्री नहीं… इसकी धीमी कुकिंग है।
जब तड़का डालकर साग मिला दिया जाए, तब 10 मिनट तक ढककर पकाओ।
बीच-बीच में चलाते रहना क्योंकि अगर नीचे लग गया तो कड़वापन आ जाता है।
धीमी आँच पर पकाने से साग “सेटल” होता है—मतलब उसमें सारी खुश्बू और स्वाद एकसाथ बंध जाते हैं।
यही वजह है कि देहाती घरों में साग हमेशा आलस से, आराम से, धीमी आँच में पकाया जाता है।
सोचो भाई… आग धीमी… भगोना भरा हुआ… घी की महक… और सर्दी का मौसम…
बस, पूरा मज़ा इसी में है।
6. अब आता है मक्के की रोटी बनाने का हिस्सा
यह थोड़ा टेक्निकल होता है, पर एक बार तरीका समझ आ जाए तो आसान।
आटा गूँथना
2 कप मक्के का आटा लो।
उसमें एक चुटकी नमक डाल दो।
अब गुनगुने पानी से धीरे-धीरे गूँथो।
मक्के का आटा गेहूँ की तरह बंधता नहीं, इसलिए आटा बहुत ज़्यादा सख्त नहीं बनाना।
थोड़ा नरम आटा ही रोटी अच्छी बनाता है।
अगर बिलकुल नहीं बंध रहा, तो बस 1 छोटा चम्मच गेहूँ का आटा मिला सकते हो—पर ज़्यादा नहीं।
रोटी बेलने का देसी तरीका
मक्के की रोटी बेलना थोड़ा मुश्किल होता है।
अगर सीधे बेलन से बेलोगे तो अक्सर फट जाती है।
इसका सबसे आसान तरीका है:
- एक पॉलिथीन या प्लास्टिक शीट लो
- उस पर थोड़ी सूखी मैदा या मक्के का आटा छिड़को
- आटे की लोई रखो
- अब हाथ से धीरे-धीरे थपथपाकर फैलाओ
रोटी जितनी पतली चाहो उतनी बना लो, बस ध्यान रहे कि किनारे बहुत पतले न हों वरना टूट जाएगी।
तवे पर सेंकना
तवा गर्म होना चाहिए, पर बहुत ज्यादा भी नहीं।
रोटी को हल्के हाथ से उठाओ और तवे पर रखो।
पहली तरफ थोड़ी देर पकाओ, फिर पलट दो।
दोनों तरफ से हल्का-हल्का दबाकर सेंको।
अगर चूल्हे की आग होती तो मज़ा दोगुना होता।
रोटी फूल जाती है, और ऊपर से देसी घी लगा दो तो बस… पूरा लंगर वाला स्वाद आ जाता है।
7. आखिर में सरसों का साग और मक्के की रोटी परोसना (सबसे मजेदार हिस्सा)
साग को कटोरी में डालो।
ऊपर से थोड़ा सा गरम घी डाल दो—बस इतना कि खुश्बू आए।
रोटी को गरम-गरम परोसो।
अगर सफेद मक्खन मिल जाए तो उसके साथ और भी मज़ेदार।
कुछ लोग साथ में गुड़ भी खाते हैं।
कुछ लोग छाछ।
और कुछ लोग प्याज के टुकड़े साथ में लेते हैं।
आप अपनी पसंद से खाओ—हर तरीका सही है।
एक छोटी सी घरेलू टिप
भाई, साग को अगर अगले दिन खाओ तो और भी स्वादिष्ट लगता है।
क्योंकि रातभर में वह पूरा बैठ जाता है और मसाले अच्छे से घुल जाते हैं।
घर में जो भी बच जाए—फ्रिज में रख दो—अगले दिन गरम करके खाओ… मज़ा दोगुना।
सरसों का साग और मक्के की रोटी – वैराइटी
भाई, देखो… सरसों का साग और मक्के की रोटी भले पुराने जमाने से चलती आ रही है, पर लोग खाने की चीज़ों में थोड़ा-बहुत बदलाव करते ही रहते हैं।
हर घर का अपना स्वाद होता है — किसी को तीखा पसंद, किसी को हल्का, किसी को घी कम, किसी को ज़्यादा।
इसी वजह से सरसों का साग और मक्के की रोटी की कई वैराइटी बन गई हैं। मैं आपको कुछ ऐसी तरहें बता रहा हूँ जो आजकल लोग अलग-अलग इलाकों में करते हैं, और मज़े की बात यह है कि सबका स्वाद एक-दूसरे से अलग होता है।
1. मेथी मिलाकर बना साग
कुछ लोगों के यहाँ सरसों के साथ थोड़ी-सी मेथी के पत्ते भी डाले जाते हैं।
मेथी साग को हल्की-सी कड़वाहट देती है, लेकिन वह कड़वाहट बुरी नहीं होती — असली देसी स्वाद देती है।
और भाई, मेथी सर्दियों में शरीर को भी गर्म रखती है, तो लोग कहते हैं कि “मौसम का पक्का खाना है।”
2. सिर्फ सरसों वाला साग
पुराने जमाने में दादी-नानी सिर्फ शुद्ध सरसों का साग बनाती थीं।
पालक या बथुआ तो चलता है, पर असल में सिर्फ सरसों वाले साग की महक ही अलग आती है।
ये थोड़ा ज्यादा कड़वा होता है, लेकिन जिन्होंने बचपन से खाया है, वो इसी को “सरसों का साग और मक्के की रोटी” मानते हैं।
3. क्रीम / मलाई वाला साग
आजकल कुछ लोग साग में ऊपर से ताज़ी मलाई या थोड़ी क्रीम डाल देते हैं।
सीधी-सी बात — स्वाद गाढ़ा हो जाता है, और मुँह में जो घुलने वाला एहसास आता है, वो किसी और चीज़ में नहीं।
ये तरीका शहरों में थोड़ा ज़्यादा अपनाया जाता है।
कुछ लोग तो तड़के में ही क्रीम डाल देते हैं।
4. लहसुन वाले तड़के का साग
देसी घरों में तड़का ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
कुछ लोग ऊपर से खास लहसुन का तड़क-तड़ाक वाला तड़का डालते हैं।
मतलब लहसुन को घी में डालकर थोड़ा ज्यादा भूरा होने देते हैं, फिर साग के ऊपर से डालते हैं।
सुगंध… भाई… पूरा घर महक जाता है।
यह वैराइटी उन लोगों की पसंद है जिन्हें खाने में तिखापन और देसी खुश्बू अधिक पसंद होती है।
5. मक्के के आटे से गाढ़ा किया हुआ साग
कुछ घरों में साग को गाढ़ा करने के लिए लोग मकई के आटे की मात्रा थोड़ी ज़्यादा रख देते हैं।
इससे साग का टेक्सचर बहुत अच्छा आता है — न ज्यादा पतला, न ज्यादा गाढ़ा।
और जब घी ऊपर से डाला जाता है तो वह एकदम सही तरह से साग में बैठ जाता है।
देसी घरों में यह सबसे सामान्य स्टाइल है।
6. टोमैटो-बेस्ड साग (हल्की खटास वाला)
कई लोग साग में टमाटर ज्यादा डालते हैं।
इससे हल्की खटास आती है, और जिनके घर में बच्चों को कड़वा साग पसंद नहीं आता — यह तरीका उनके लिए परफेक्ट है।
टमाटर थोड़ा साग को स्मूथ भी बना देता है।
7. पालक और सरसों का 50-50 मिक्स
आजकल शहरों में कई लोग 50% सरसों और 50% पालक का मिक्स बनाते हैं।
इससे साग ज्यादा चिकना और स्मूथ हो जाता है।
स्वाद थोड़ा हल्का हो जाता है, और जिन्हें सरसों की पत्ती की कड़वाहट पसंद नहीं — उनके लिए यह बेस्ट विकल्प है।
8. बथुआ वाला देसी साग
कुछ गाँवों में सरसों और पालक के साथ बथुआ खासतौर पर डाला जाता है।
बथुआ अपने आप में ही बहुत हेल्दी होता है — और सर्दियों में खूब मिलता है।
इससे साग एकदम संतुलित हो जाता है।
न बहुत तीखा, न बहुत कड़वा — बस एकदम देसी, मिट्टी जैसा स्वाद।
9. चटपटा प्याज़ वाला साग
कुछ इलाकों में लोग साग में थोड़ा ज्यादा प्याज डालते हैं, और प्याज़ को अच्छी तरह भूरा होने तक भूनते हैं।
इससे साग का रंग थोड़ा गहरा आता है और स्वाद भी थोड़ा चटपटा हो जाता है।
यह तरीका शहरी इलाकों में काफी लोकप्रिय है।
10. मक्खन वाले तड़के का साग
कुछ घरों में तड़का घी से नहीं बल्कि सफेद मक्खन से लगाया जाता है।
देसी सफेद मक्खन की जो खुश्बू और मुलायमपन है — भाई, उसका मुकाबला कोई तेल या घी नहीं कर सकता।
इससे साग का स्वाद बेहद हल्का, स्मूथ और मीठा सा हो जाता है।
11. चूल्हे पर बना हुआ असली देहाती साग
यह असली “वैराइटी” नहीं, पर अनुभव है।
जो साग चूल्हे की लकड़ी पर धीमी आँच में पकता है — उसका स्वाद दुनिया में कहीं नहीं मिलता।
जैसे धुएँ की हल्की खुश्बू साग में घुस जाती है, वह एकदम देसी गाँव का एहसास देती है।
ये आज भी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और यूपी के कई गाँवों में ऐसे ही बनता है।
सरसों का साग और मक्के की रोटी – 10 स्वास्थ्य लाभ
भाई, अब बात करते हैं इसके फायदे की।
जितना ये स्वाद में बढ़िया है, उतना ही ये शरीर को भी फायदा देता है।
पुराने जमाने में किसान लोग इसे ताकत का सरसों का साग और मक्के की रोटी खाना कहते थे… और सच बोलूँ तो, उनके हिसाब से सरसों का साग और मक्के की रोटी पूरा “पावर पैक” है।
नीचे मैं 10 स्वास्थ्य लाभ एकदम आसानी से, अपने अंदाज़ में समझा रहा हूँ:
1. पाचन को बहुत बढ़िया बनाता है
साग में फाइबर अच्छा खासा होता है।
जिसका मतलब — खाना आसानी से हज़म होता है, कब्ज की दिक्कत कम होती है, पेट हल्का लगता है।
खासकर सर्दियों में पाचन थोड़ा धीमा होता है, तो यह शरीर को बैलेंस कर देता है।
2. शरीर में खून बढ़ाने में मदद
सरसों, पालक और बथुआ — तीनों ही आयरन से भरपूर होते हैं।
इससे खून की कमी (एनीमिया) वाले लोगों को फायदा मिलता है।
थोड़ा नियमित खाएँ तो कमजोरी भी कम महसूस होती है।
3. विटामिन A से आँखों और त्वचा को फायदा
साग में विटामिन A बहुत अच्छी मात्रा में होता है।
इससे आँखों की रोशनी, त्वचा की चमक और बालों की हेल्थ में सुधार आता है।
शायद इसी कारण पुराने लोग चेहरे पर चमक लिए घूमते थे — साग खाते थे भाई!
4. इम्यूनिटी मजबूत बनाता है
सर्दियों का खाना है — और उसी में विटामिन C, A, फाइबर, आयरन सब मौजूद।
इन सबका कॉम्बिनेशन शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
कमज़ोर लोग अगर साग खाएँ, तो सर्दी-जुकाम भी कम पकड़ता है।
5. हड्डियों को मजबूत करता है
सरसों के पत्तों में कैल्शियम और विटामिन K अच्छा खासा होता है।
जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
बुज़ुर्ग लोग अक्सर कहते हैं — “साग खाओ, हड्डियाँ चलेंगी।”
बात सच है।
6. पेट को लंबे समय तक भरा रखता है
फाइबर ज्यादा होने की वजह से यह पेट को जल्दी खाली नहीं होने देता।
इससे बार-बार खाने की आदत कम होती है।
वजन कंट्रोल में भी मदद मिलती है… बशर्ते घी थोड़ा कंट्रोल में हो।
7. ग्लूटेन-फ्री विकल्प — गैस/एसिडिटी वालों के लिए अच्छा
मक्के की रोटी में ग्लूटेन नहीं होता।
तो जिनको गेहूँ या मैदा से गैस, भारीपन या पेट फूलने की समस्या हो — उनके लिए यह बिल्कुल सही है।
साथ में साग मिल जाए तो डाइजेशन और भी अच्छा रहता है।
8. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद
साग में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट दिल के लिए फायदेमंद होते हैं।
यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में सहायता करते हैं।
घी कम रखो तो हार्ट के लिए भी बहुत अच्छा खाना है।
9. सर्दियों में शरीर को गर्म रखता है
सरसों और घी का कॉम्बिनेशन शरीर में प्राकृतिक गर्मी पैदा करता है।
इसलिए गाँवों में लोग सर्दियों में इसे जरूरी खाना मानते हैं।
बहुत ठंड वाले राज्यों में तो यह पूरा “विंटर मेडिसिन” जैसा ही माना जाता है।
10. शरीर को डिटॉक्स करने में मदद
साग पानी, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है।
यह शरीर के अंदर जमा टॉक्सिन्स बाहर निकालने में सहायक है।
पेट साफ, खून साफ — और पूरा शरीर हल्का महसूस होता है।

सरसों का साग और मक्के की रोटी
Equipment
- सरसों का साग और मक्के की रोटी
Ingredients
सरसों का साग बनाने की सामग्री
- सरसों के पत्ते – करीब आधा किलो या जितना घर में लोग हों
- पालक – 150–200 ग्राम इससे साग थोड़ा मुलायम बनता है
- बथुआ – एक मुट्ठी या 100–150 ग्राम स्वाद बढ़ाता है
- अदरक – एक इंच का टुकड़ा स्वाद भी और गर्माहट भी
- लहसुन – 6–7 कलियाँ देसी खुश्बू के लिए
- हरी मिर्च – 2–3 अपने स्वाद के अनुसार
- प्याज़ – 1 बड़ा बारीक काट लें
- टमाटर – 1–2 हल्की खटास के लिए
- नमक – जितना आपको ठीक लगे
- लाल मिर्च – आधा से एक चम्मच
- मकई का आटा – 2–3 चम्मच साग गाढ़ा करने के लिए
- घी – 2–3 चम्मच तड़के के लिए
- हींग – एक छोटी चुटकी चाहें तो डालें नहीं तो छोड़ दें
- थोड़ा पानी – पत्ते पकाने के लिए
मक्के की रोटी बनाने की सामग्री
- मक्के का आटा – 2 कप जितनी रोटी चाहिए उसके हिसाब से
- गुनगुना पानी – आटा गूँथने के लिए
- नमक – एक चुटकी चाहें तो डालें
- थोड़ा गेहूँ का आटा – वैकल्पिक रोटी बेलना आसान हो जाता है
- घी या मक्खन – रोटी पर लगाने के लिए
Instructions
सबसे पहले पत्तों की सफाई और तैयारी
- भाई, सरसों का साग बनाते समय सबसे बड़ा काम होता है पत्ते साफ करना।
- सरसों, पालक, बथुआ—जो भी इस्तेमाल कर रहे हो—सबको अच्छे से छाँटकर अलग कर लो।
- कई बार पत्तों में मिट्टी और छोटे-छोटे डंठल फँसे रहते हैं, इसलिए 2–3 बार साफ पानी से धो लो।
- ठंड के मौसम में पत्तों पर ओस जमा रहती है, इसलिए धोने के बाद हल्का सा झाड़कर टोकरी में फैला दो।
- काटने का तरीका बहुत महीन नहीं रखना।
- देसी साग मोटा-मोटा ही अच्छा लगता है।
- दादी-नानी तो हाथ से ही तोड़ती थीं, चाकू की ज़रूरत ही नहीं।
- अगर आप चाकू से काट रहे हो, तो भी बहुत बारीक मत कटना—वरना पकाते समय पेस्ट जैसा हो जाता है।
बड़े भगोने में पत्ते उबालना
- अब एक बड़ा सा भगोना (या कुकर भी चलेगा) ले लो।
- उसमें सारे पत्ते डाल दो।
- थोड़ा सा पानी डालो—बहुत ज़्यादा नहीं, क्योंकि पत्ते खुद भी पानी छोड़ते हैं।
- आँच मध्यम रखो और पत्तों को पकने दो।
- पहले सरसों और बथुआ पकने में समय लेते हैं, पालक जल्दी पक जाता है।
- अगर चाहो तो पहले सरसों-बथुआ डालकर 10 मिनट बाद पालक डाल सकते हो।
- लेकिन एक साथ भी डाल दो तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
- धीरे-धीरे जैसे-जैसे पत्ते गलने लगेंगे, एक अलग ही खुश्बू आएगी।
- पकाते वक्त बीच-बीच में चलाते रहना।
- ये काम थोड़ा धीमा होता है, करीब 25–30 मिनट लग जाते हैं।
- देसी स्टाइल में तो लोग 40–45 मिनट तक पकाते हैं—स्वाद और बढ़ जाता है।
पके हुए साग को कूटना
- जब पत्ते अच्छे से नरम हो जाएँ, तब गैस बंद करो और इसे थोड़ा ठंडा होने दो।
- अब आता है देसी तरीका—कूटना।
- भाई, पुराने ज़माने में लकड़ी का मूसल होता था, उसी से कूटते थे।
- आजकल लोग मिक्सर का शॉर्टकट लेते हैं, पर मिक्सर में पेस्ट बन जाता है और देसी टेक्सचर खत्म हो जाता है।
- अगर समय हो और मन करे, तो बड़े चम्मच से या मूसल से ही कूटो।
- मकई का थोड़ा सा आटा (2–3 चम्मच) डालकर कूटो तो साग हल्का गाढ़ा और मज़ेदार बनता है।
- मिक्सर का इस्तेमाल करना पड़े, तो सिर्फ 1–2 पल्स दो—ज्यादा बिलकुल नहीं।
अब करते हैं असली काम – तड़का
- साग का पूरा स्वाद तड़के पर ही टिकता है।
- अगर तड़का अच्छा, तो साग लाजवाब।
- एक पैन लो और उसमें 2–3 चम्मच घी डालो।
- घी थोड़ा गरम हो जाए तो एक चुटकी हींग डाल दो।
- इससे सुगंध किचन में फैलने लगेगी।
- अब इसमें बारीक कटा प्याज़ डालो।
- हल्का सुनहरा होने तक भूनो।
- फिर कुटी हुई लहसुन की कलियाँ डाल दो—6–7 कलियाँ काफी हैं।
- लहसुन जब हल्का भूरा होने लगे, तभी कटी हरी मिर्च डालो।
- टमाटर डालने पर हल्की खटास आती है, जो साग को संतुलित करती है।
- 1–2 टमाटर काफी हैं।
- इन्हें भूनते रहो जबतक मिश्रण थोड़ा नरम न हो जाए।
- अब यह पूरा तड़का बड़े भगोने में पड़े साग में डाल दो।
- अच्छी तरह मिलाओ।
- फिर 10–12 मिनट धीमी आँच पर पकने दो।
- यहीं से असली देहाती खुश्बू आती है—जिसे कोई रेस्तराँ कॉपी नहीं कर सकता।
साग को धीमी आँच पर बैठाना (सबसे जरूरी स्टेप)
- भाई, साग का राज़ सिर्फ सामग्री नहीं… इसकी धीमी कुकिंग है।
- जब तड़का डालकर साग मिला दिया जाए, तब 10 मिनट तक ढककर पकाओ।
- बीच-बीच में चलाते रहना क्योंकि अगर नीचे लग गया तो कड़वापन आ जाता है।
- धीमी आँच पर पकाने से साग “सेटल” होता है—मतलब उसमें सारी खुश्बू और स्वाद एकसाथ बंध जाते हैं।
- यही वजह है कि देहाती घरों में साग हमेशा आलस से, आराम से, धीमी आँच में पकाया जाता है।
- सोचो भाई… आग धीमी… भगोना भरा हुआ… घी की महक… और सर्दी का मौसम…
- बस, पूरा मज़ा इसी में है।
अब आता है मक्के की रोटी बनाने का हिस्सा
- यह थोड़ा टेक्निकल होता है, पर एक बार तरीका समझ आ जाए तो आसान।
आटा गूँथना
- 2 कप मक्के का आटा लो।
- उसमें एक चुटकी नमक डाल दो।
- अब गुनगुने पानी से धीरे-धीरे गूँथो।
- मक्के का आटा गेहूँ की तरह बंधता नहीं, इसलिए आटा बहुत ज़्यादा सख्त नहीं बनाना।
- थोड़ा नरम आटा ही रोटी अच्छी बनाता है।
- अगर बिलकुल नहीं बंध रहा, तो बस 1 छोटा चम्मच गेहूँ का आटा मिला सकते हो—पर ज़्यादा नहीं।
रोटी बेलने का देसी तरीका
- मक्के की रोटी बेलना थोड़ा मुश्किल होता है।
- अगर सीधे बेलन से बेलोगे तो अक्सर फट जाती है।
- इसका सबसे आसान तरीका है:
- एक पॉलिथीन या प्लास्टिक शीट लो
- उस पर थोड़ी सूखी मैदा या मक्के का आटा छिड़को
- आटे की लोई रखो
- अब हाथ से धीरे-धीरे थपथपाकर फैलाओ
- रोटी जितनी पतली चाहो उतनी बना लो, बस ध्यान रहे कि किनारे बहुत पतले न हों वरना टूट जाएगी।
तवे पर सेंकना
- तवा गर्म होना चाहिए, पर बहुत ज्यादा भी नहीं।
- रोटी को हल्के हाथ से उठाओ और तवे पर रखो।
- पहली तरफ थोड़ी देर पकाओ, फिर पलट दो।
- दोनों तरफ से हल्का-हल्का दबाकर सेंको।
- अगर चूल्हे की आग होती तो मज़ा दोगुना होता।
- रोटी फूल जाती है, और ऊपर से देसी घी लगा दो तो बस… पूरा लंगर वाला स्वाद आ जाता है।
आखिर में परोसना (सबसे मजेदार हिस्सा)
- साग को कटोरी में डालो।
- ऊपर से थोड़ा सा गरम घी डाल दो—बस इतना कि खुश्बू आए।
- रोटी को गरम-गरम परोसो।
- अगर सफेद मक्खन मिल जाए तो उसके साथ और भी मज़ेदार।
- कुछ लोग साथ में गुड़ भी खाते हैं।
- कुछ लोग छाछ।
- और कुछ लोग प्याज के टुकड़े साथ में लेते हैं।
- आप अपनी पसंद से खाओ—हर तरीका सही है।
एक छोटी सी घरेलू टिप
- भाई, साग को अगर अगले दिन खाओ तो और भी स्वादिष्ट लगता है।
- क्योंकि रातभर में वह पूरा बैठ जाता है और मसाले अच्छे से घुल जाते हैं।
- घर में जो भी बच जाए—फ्रिज में रख दो—अगले दिन गरम करके खाओ… मज़ा दोगुना।
Nutrition Chart (टेबल फॉर्म में — 100 ग्राम साग + 1 मक्के की रोटी का अनुमान)
| पोषक तत्व (Nutrient) | मात्रा (Approx) | आसान भाषा में मतलब |
| कैलोरी (Calories) | 210–240 kcal | पेट भरने और ऊर्जा देने लायक |
| प्रोटीन (Protein) | 5–6 ग्राम | शरीर को ताकत, मांसपेशियों को सपोर्ट |
| कार्ब्स (Carbohydrates) | 30–35 ग्राम | पूरे दिन काम करने की ऊर्जा |
| फाइबर (Fiber) | 6–7 ग्राम | पेट साफ रखने में मदद |
| फैट (Fat) | 6–8 ग्राम | घी की मात्रा पर निर्भर |
| कैल्शियम (Calcium) | 150–180 mg | हड्डियों को मजबूत |
| आयरन (Iron) | 3–4 mg | खून बढ़ाने में मदद |
| विटामिन A | 2500–3000 IU | आँखों और त्वचा के लिए बढ़िया |
| विटामिन C | 30–40 mg | इम्यूनिटी बढ़ाए |
| विटामिन K | अच्छी मात्रा | हड्डियों और रक्त जमने में काम आता है |
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FAQs – सरसों का साग और मक्के की रोटी
1. क्या सरसों का साग और मक्के की रोटी सिर्फ सर्दियों में बनता है?
हाँ भाई, असली मज़ा तो ठंड में ही आता है। सर्दियों में सरसों के पत्ते ताज़ा और ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं।
2.सरसों का साग और मक्के की रोटी में पालक या बथुआ डालना जरूरी है?
जरूरी नहीं, लेकिन डालोगे तो साग चिकना और संतुलित बन जाता है।
सिर्फ सरसों का साग थोड़ा करवा लग सकता है।
3. क्या मिक्सर में साग पीस सकते हैं?
हाँ, पर थोड़ा-सा ही।
ज्यादा पीसोगे तो पेस्ट जैसा हो जाएगा और देसी टेक्सचर चला जाएगा।
4. मक्के की रोटी बार-बार क्यों फटती है?
क्योंकि आटा या तो बहुत सख्त होता है या बहुत सूखा।
थोड़ा गुनगुना पानी डालकर नरम आटा गूँथो — रोटी आसानी से बनेगी।
5. क्या साग वजन घटाने में मदद करता है?
अगर घी-मक्खन कम रखो तो हाँ, बहुत हेल्दी विकल्प है।
फाइबर ज्यादा होता है, तो पेट भी जल्दी भरता है।
6. क्या साग अगले दिन और भी स्वादिष्ट लगता है?
बिल्कुल!
रात भर में मसाले उसमें अच्छे से बैठ जाते हैं, और स्वाद दोगुना हो जाता है।
7. क्या मक्के की रोटी ग्लूटेन-फ्री होती है?
हाँ भाई, मक्का में ग्लूटेन नहीं होता।
जिन्हें गेहूँ से दिक्कत है, उनके लिए बिल्कुल सही।
8. क्या बच्चे भी साग खा सकते हैं?
खुलकर खा सकते हैं।
बस मसाला हल्का रखो, और ज्यादा तीखा मत बनाओ।
9. क्या साग में घी जरूरी है?
जरूरी तो नहीं… पर बिना घी के मज़ा आधा रह जाता है।
देसी घी की खुश्बू ही इसकी जान है।
10. क्या साग-रोटी से कमजोरी में फायदा होता है?
हाँ, इसमें आयरन, कैल्शियम, फाइबर सब होते हैं।
नियमित खाओ तो शरीर में ताकत महसूस होगी।
निष्कर्ष -सरसों का साग और मक्के की रोटी
आखिर में भाई… यही कहना है कि सरसों का साग और मक्के की रोटी सिर्फ एक डिश नहीं — ये एक एहसास है।
सर्दियों में जब रसोई में साग की खुश्बू फैलती है, और तवे पर मक्के की रोटी की हल्की सी सीझ की आवाज़ आती है — तो मन खुद-ब-खुद खुश हो जाता है।
यह सरसों का साग और मक्के की रोटी खाना देसी मिट्टी की खुश्बू लिए हुए है।
सरल भी है, पौष्टिक भी, और पेट भरने वाला भी।
किसी भी उम्र के लोग इसे खा सकते हैं।
और सबसे बड़ी बात — इसे खाने में एक अपनापन महसूस होता है, जैसे घर की गर्माहट खुद थाली में उतर आई हो।
अगर आपने कभी खुद से सरसों का साग और मक्के की रोटीबनाकर नहीं खाया, तो भाई एक बार जरूर ट्राय करना।
थोड़ी मेहनत है — पर स्वाद… सच में, दिल जीत लेता है।