“मालपुआ रेसिपी – बिहार की पारंपरिक मिठाई। जानें आसान विधि, सामग्री, स्वास्थ्य लाभ, पोषण चार्ट और वैराइटी। होली व छठ के लिए बेस्ट मिठाई।”
मालपुआ रेसिपी का परिचय
मालपुआ रेसिपी भारत की पारंपरिक और सबसे पुरानी मिठाइयों में से एक है, जिसका स्वाद और सुगंध गाँव से लेकर शहर तक लोगों को अपनी ओर खींच लेता है। यह एक तरह का मीठा पैनकेक (Sweet Pancake) है, जिसे खासतौर पर त्योहारों, व्रत-पूजन और शुभ अवसरों पर बनाया जाता है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों में इसका विशेष महत्व है।
बिहार में मालपुआ रेसिपी का स्थान उतना ही खास है जितना लिट्टी-चोखा का। छठ पूजा, होली और सावन के महीने में यह मिठाई लगभग हर घर में ज़रूर बनती है। दूध, मावा, मैदा और सूजी जैसे साधारण अवयवों से बनने वाली यह डिश अपने स्वाद, नरमी और सुगंध के कारण हर किसी की पसंद बन जाती है।
मालपुआ रेसिपी की खासियत यह है कि इसे चाशनी में डुबोकर परोसा जाता है और कई जगह इसे गाढ़ी रबड़ी के साथ परोसने की परंपरा है। इसका सुनहरा रंग, बाहर से हल्की कुरकुराहट और अंदर से नरम व रसदार बनावट इसे बेहद लज़ीज़ बना देती है।
कुल मिलाकर, मालपुआ रेसिपी केवल एक मिठाई नहीं बल्कि बिहार की संस्कृति और परंपरा का मीठा प्रतीक है।
मालपुआ रेसिपी का इतिहास
मालपुआ रेसिपी का इतिहास भारतीय भोजन संस्कृति जितना ही प्राचीन है। इसे भारत की सबसे पुरानी मिठाइयों में गिना जाता है, जिसका ज़िक्र कई धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक लेखों में मिलता है।
प्राचीन काल
वैदिक काल से ही अन्न, दूध और घी का प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता था।“पुआ” (पकवान) शब्द संस्कृत के “पक्व” से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है “पका हुआ” या “तला हुआ पकवान”।उस समय गेहूँ के आटे और गुड़ से बने पुए भगवान को भोग के रूप में चढ़ाए जाते थे। यही आगे चलकर मालपुआ रेसिपी कहलाए।
धार्मिक परंपरा
बिहार और पूर्वी भारत में छठ पूजा पर मालपुआ रेसिपी का विशेष महत्व है। इसे भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देने से पहले प्रसाद के रूप में बनाया जाता है।ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में भी मालपुआ जैसी डिश “अमालू” को भगवान जगन्नाथ को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।
मुगल काल का असर
मुगल काल में भारतीय मिठाइयों में सूखे मेवे, केसर, इलायची और रबड़ी का इस्तेमाल बढ़ा।मालपुआ रेसिपी भी इस दौर में और समृद्ध हुआ और इसे रबड़ी के साथ परोसने की परंपरा शुरू हुई।
क्षेत्रीय विविधताएँ
बिहार और झारखंड – दूध, मैदा और सूजी से बने को चाशनी में मालपुआ रेसिपीडुबोकर परोसा जाता है।ओडिशा – यहाँ मालपुआ रेसिपी (अमालू) मंदिरों में प्रसाद के रूप में मिलता है।राजस्थान और उत्तर प्रदेश – यहाँ का मालपुआ रेसिपी थोड़ा मोटा और रबड़ी के साथ परोसा जाता है।बंगाल – गुड़ से बने मालपुआ रेसिपी खास सर्दियों में लोकप्रिय हैं।
इस तरह, मालपुआ रेसिपी इस तरह, मालपुआ सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि हज़ारों साल पुरानी भारतीय परंपरा और त्योहारों का अभिन्न हिस्सा है।
इस तरह, मालपुआ रेसिपी सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि हज़ारों साल पुरानी भारतीय परंपरा और त्योहारों का अभिन्न हिस्सा है।
INGREDIENTS
- मैदा – 1 कप
- सूजी – ½ कप
- दूध – 2 कप (गाढ़ा दूध बेहतर रहेगा, मावा/खोया हो तो और अच्छा)
- चीनी – 1 कप
- इलायची पाउडर – ½ चम्मच
- सौंफ – 1 चम्मच (दरदरी पिसी हुई)
- बेकिंग सोडा – एक चुटकी (Optional)
- घी – तलने के लिए
- इलायची -2
- केसर की कुछ पत्तियाँ
मालपुआ रेसिपी बनाने की विधि
स्टेप-बाय-स्टेप विधि
1 दूध तैयार करना (यदि आप मावा/खोया अपने दूध से बना रहे हैं)
1. सबसे पहले अगर आप घरेलू मावा (खोया) बना रहे हैं तो 1.25 लीटर दूध धीमी आँच पर रखें। बीच-बीच में चलाते जाएँ ताकि नीचे जमे नहीं। दूध को तब तक उबालकर लगातार उबालें जब तक दूध लगभग आधा न रह जाए और गाढ़ा क्रीम जैसा टेक्सचर न बन जाए — यह प्रक्रिया आमतौर पर 30–45 मिनट ले सकती है।
2. जब दूध गाढ़ा हो जाए तो चूल्हे से उतारकर ठंडा होने दें। यदि आप मावा नहीं बना रहे हैं तो सीधे सामान्य ताज़ा दूध का उपयोग करें।
3. ध्यान: दूध को तेज आँच पर न छोड़ें — जलन या दही बनना समस्या पैदा कर सकता है।टिप: बाजार का खोया/मावा इस्तेमाल कर रहे हों तो 100–125 ग्राम मावा घिसकर बैटर में मिलाएँ — इससे मालपुआ और समृद्ध बनता है।
2.सूखी सामग्री को छानना और मिलाना
1. एक बर्तन में मैदा और सूजी को एक साथ छान लें ताकि किसी प्रकार की गांठ ना रहे। छानने से बैटर हल्का रहेगा और मिक्सचर स्मूद बनेगा।
2. इसमें इलायची पाउडर और पिसी सौंफ मिलाएँ।
3. Optional: बैटर में बेकिंग सोडा की एक चुटकी डालने से परिणाम में हल्की फुलावट आती है — पर बहुत अधिक सोडा से स्वाद में कड़वाहट आ सकती है। अगर आप बेकिंग सोडा नहीं डालना चाहते तो ¼ चम्मच इन्स्टेंट यीस्ट गुनगुने पानी में घोलकर 10–15 मिनट पहले सक्रिय कर लें और बैटर में मिलाएँ (थोड़ी खमीर जैसी सुगंध और नरमी देगी)।
3. बैटर (घोल) बनाना — टेक्निक और संकेत
1. अब छानी हुई सूखी सामग्री में धीरे-धीरे दूध डालें और अच्छे से फेंटें। यदि आपने मावा डाला है तो पहले मावा को दूध में अच्छी तरह मिला लें ताकि घोल समरूप हो।
2. बैटर की वांछित कंसिस्टेंसी: यह थोड़ी गाढ़ी पैनकेक वाले घोल से पतला और पकोड़े के घोल से थोड़ा पतला होना चाहिए — यानी करछी से निकालने पर घोल धीरे-धीरे गिरना चाहिए, बहुत पतला न हो (जो फैलकर बहुत ज्यादा पतले घेरे बनाए)।
तकनीकी संकेत: करछी पर घोल का एक गोला छोड़ें, वह 4–6 सेकंड में आकृति बनाए रखे और फैलना धीमा हो।
3. बैटर में 2–3 बड़े चम्मच चीनी मिला दें (अल्प मात्रा) — इससे बैटर थोड़ा सहज खमीर जैसा व्यवहार करेगा और तलने पर रंग अच्छा आएगा।
4. अच्छे से फेंटने के बाद बैटर को ढककर 1 से 2 घंटे कमरे के तापमान पर आराम दें। यह समय सूजी को फूलने देता है और बैटर का टेक्सचर स्मूद हो जाता है। बहुत अधिक देर तक न रखें (5–6 घंटे) वरना खटास आ सकती है।
टिप: अगर आप तुरंत बनाना चाहते हैं तो कम से कम 30 मिनट छोड़ दें — पर 1–2 घंटे का आराम श्रेष्ठ परिणाम देता है।
समस्या-समाधान: यदि बैटर बहुत गाढ़ा लगे तो थोड़ा दूध मिलाकर समायोजित करें; बहुत पतला होने पर 1–2 बड़े चम्मच बेसन/मैदा मिलाएँ।
4. चाशनी (शक्कर की चाशनी) बनाना
1. एक मध्यम आकार के पैन में 1 कप चीनी और ½ कप पानी डालकर धीमी आँच पर रखें।
2. चीनी को घुलने दें, बीच-बीच में ऊपर की झाग को हटाते जाएँ ताकि चाशनी साफ़ दिखे।
3. जब चीनी पूरी तरह घुल जाए और चाशनी उबलने लगे, तो आँच को मध्यम-नीची रखें। चाशनी को एक तार (एक तार की कन्सिस्टेंसी) पर पकाना अच्छा होता है — यह पारंपरिक मालपुआ के लिए उपयुक्त है।
तार की जाँच: चाशनी का एक छोटा सा भाग उँगली पर (या ठंडी चम्मच पर) लेकर देखें — यदि एक पतली तार बनती है और टूटती है तो एक-तार स्टेज है। (एक तार लगभग 104–106°C के आसपास होता है)।
4. जब एक तार की स्थिति प्राप्त हो जाए तो गैस बंद कर दें और थोड़ा सा केसर/इलायची पाउडर डालें। चाशनी को गरम रखें — मालपुए में डालने के लिए चाशनी और मालपुआ दोनों गरम होने चाहिए।
ध्यान: चाशनी को बहुत गाढ़ा न बनाएं; अगर गाढ़ी हो गई है तो उसमें थोड़ा गर्म पानी मिलाकर समायोजित कर लें और फिर गरम कर लें। चाशनी बहुत पतली भी न रखें, नहीं तो मालपुआ चाशनी पकाकर पानी जैसा हो सकता है।
5. घी/तेल गरम करना और तलने की तैयारी
1. मध्यम आकार की कड़ाही में पर्याप्त घी डालें — गहरे तलने के लिए 3–4 इंच घी की परत रखें ताकि पुआ सही तरह तले। परंतु अगर कम घी रखें तो बैटर डूबकर ठीक से नहीं पक पाएगा।
2. घी गरम करने के संकेत: करछी का एक छोटा हिस्सा घी में डालें — अगर चारों तरफ़ बुलबुले स्थिर रूप से उठें और तेज़ न हो तो ताप सही है। तापमान सामान्यतः मध्यम-निम्न होना चाहिए (लगभग 160–175°C) — बहुत अधिक गरम होने पर बाहरी हिस्सा जल जाएगा और अंदर कच्चा रहेगा।
3. एक छोटा बैटर ड्रॉप करके टेस्ट करें — यदि बैटर तेजी से ऊपर उठकर सुनहरा हो रहा है और अंदर से कच्चापन न रह जाए तो ताप उपयुक्त है।
टिप: यदि आपके पास थर्मामीटर है तो 160–170°C सर्वोत्तम। गैस पर आँच को मध्यम रखें और पूरे तलने के दौरान ताप नियंत्रित रखें।
6.मालपुए को तलना
1. करछी या छोटी कटोरी से बैटर लें — पारंपरिक तरीके से करछी से घोल लेकर कड़ाही में गोल आकार में डालें। बैटर अपने आप गोलाकार फैल जाता है; यदि आप थोड़ा पतला और बड़े गोल पुआ चाहें तो करछी में बैटर और घी की सतह के बीच से धीरे बहा दें।
2. घोल डालते ही बैटर के किनारों से छोटे बुलबुले बनना शुरू होते हैं — यह संकेत है कि तलना शुरू हो गया। धीमी से मध्यम आँच रखें।
3. पहली साइड को तब तक तलें जब तक किनारा हल्का सुनहरा न हो और मध्य में छेद-छेद न दिखाई दें (लगभग 40–60 सेकंड, बैटर की मोटाई के अनुसार)। फिर स्पैचुला से धीरे पलटें और दूसरी साइड भी समान रूप से सुनहरी होने तक तलें (20–40 सेकंड)।
4. बाहर से सुनहरा-नारंगी रंग और हल्की कुरकुराहट चाहिए, पर अंदर नरमी बनी रहे — इसे हासिल करने के लिए ताप को नियंत्रित रखना ज़रूरी है।
5. तले हुए मालपुए को जाली चमचा से निकालकर किचन पेपर पर निकाल लें ताकि अतिरिक्त घी निकल जाए।
समस्याएँ और सुधार:अगर बाहर जल रहा है और अंदर कच्चा है → आँच कम करें।अगर बहुत तेल सोख रहा है → बैटर बहुत पतला है; थोड़ा मैदा मिलाकर गाढ़ा करें या घी का ताप थोड़ा बढ़ाएँ पर संतुलित रखें।
सही रंग पाने में देर हो रही है → घी का ताप थोड़ा बढ़ाएँ पर जलने से पहले ही निकालें।
7. चाशनी में भिगोना
1. चाशनी और मालपुए दोनों गरम होने चाहिए — यदि चाशनी ठंडी होगी तो मालपुआ रेसिपी चाशनी उतनी नहीं अवशोषित करेगा। और यदि चाशनी बहुत गर्म और पतली होगी तो मालपुए बहुत गीले बन सकते हैं। आदर्श: चाशनी गर्म और मध्यम गाढ़ी हो।
2. तले हुए मालपुए को गरम चाशनी में सीधे डालें — हर पुए को लगभग 30–60 सेकंड के लिए चाशनी में रखें ताकि वे अच्छे से भीग जाएँ। यदि आप रबड़ी के साथ परोस रहे हैं तो हल्का कम समय दें ताकि मालपुआ बहुत अधिक नरम न हो।
3. चाशनी में डालते समय चाशनी का ताप लगभग 60–70°C जैसा महसूस होना चाहिए — ज्यादा गरम चाशनी और बहुत लम्बा भिगोना दोनों से मालपुआ बहुत गीला हो सकता है।
टिप: चाशनी में भिगोने के बाद मालपुआ को प्लेट पर निकाल कर ऊपर से पिस्ता/बादाम छिड़कें। यदि आप रबड़ी डालने जा रहे हैं तो चाशनी में थोड़ी कम समय दें और रबड़ी पर रखें — इससे संतुलन अच्छा रहता है।
8 रबड़ी (यदि आप रबड़ी बनाना चाहें) — त्वरित विधि
1. 500 मिली दूध को भारी तले की पैन में मध्यम आँच पर रखें। आँच धीमी रखें और दूध को तब तक उबालें जब तक आधा न रह जाए (30–40 मिनट)। बीच-बीच में किनारों से जमा मलाई को स्क्रैप कर वापस दूध में मिला दें।
2. छलनी में छीनी हुई चीनी (4–6 टेबलस्पून) डालकर स्वाद अनुसार मीठा कर लें। अंत में इलायची पाउडर और कटे हुए मेवे डालें।
3. रबड़ी को गाढ़ा और क्रीमी बनाना है; जब टेक्सचर गाढ़ा और चम्मच पर चढ़ने लायक हो जाए तो गैस बंद कर दें। रबड़ी को ठंडा होने पर मालपुए के साथ सर्व करें।
नोट: रबड़ी बनाना समय-साध्य है; आप बाजार की थिक कंडेंस्ड मिल्क से भी त्वरित रबड़ी बना सकते हैं — 1 भाग कंडेंस्ड मिल्क + 2 भाग उबला और थोड़ा ठंडा किया हुआ दूध + इलायची/नूट्स मिलाकर।
9. सर्विंग और सजाावट
1. गरम मालपुए को प्लेट पर रखें, ऊपर से थोड़ा केसर के तार, पिसा पिस्ता/बादाम और थोड़ी इलायची पाउडर छिड़कें।
2. रबड़ी के साथ परोसें: प्लेट पर पहले रबड़ी बिछाएँ और ऊपर मालपुआ रखें — या अलग बाउल में रबड़ी दें ताकि खाने वाला अपनी पसंद अनुसार ले सके।
3. कुछ लोकेशन में फिंगर फूड के रूप में छोटे मालपुए बनाए जाते हैं जो बच्चों और पार्टी में लोकप्रिय होते हैं।
10. सामान्य गलतियाँ और उनका त्वरित समाधान
बैटर बहुत पतला → मैदा/सूजी थोड़ी मात्रा में मिलाएँ।
बैटर ज़्यादा गाढ़ा → थोड़ा दूध मिलाकर पतलापन समायोजित करें।
मालपुआ अंदर कच्चा और बाहर जल गया → आँच कम रखें; बैटर में बेकिंग सोडा कम करें।
मालपुआ ज़्यादा तेल सोख रहा है → बैटर पतला है या घी बहुत ठंडा था; बैटर का गाढ़ापन जाँचें और तेल का ताप नियंत्रित करें।
चाशनी बहुत गाढ़ी/कड़ी हो गई → उसमें थोड़ा गर्म पानी मिलाएँ और फिर गरम कर लें।
चाशनी बहुत पतली है → थोड़ी और चीनी डालकर हल्की उबाल दें पर ध्यान रखें कि एक-तार से अधिक गाढ़ी न हो।
11.वेरिएशन्स
मावा मालपुआ: बैटर में 100–150 ग्राम कद्दूकस किया हुआ मावा मिलाएँ — इससे मालपुआ और ज़्यादा मलाईदार रहेगा।
गुड़ वाला मालपुआ: चाशनी की जगह गुड़ की चाशनी बनाइए — गुड़ को पानी में घोलकर छान लें और हल्की पकाई कर केसर/इलायची डालकर उपयोग करें।
नारियल/खोया/मक्खन वैरिएंट: बैटर में थोड़ी कद्दूकस की हुई नारियल या 1–2 बड़े चम्मच मक्खन मिला कर स्वाद बदल सकते हैं।

मालपुआ रेसिपी
Equipment
- मालपुआ रेसिपी
Ingredients
- मैदा – 1 कप
- सूजी – ½ कप
- दूध – 2 कप गाढ़ा दूध बेहतर रहेगा, मावा/खोया हो तो और अच्छा
- चीनी – 1 कप
- इलायची पाउडर – ½ चम्मच
- सौंफ – 1 चम्मच दरदरी पिसी हुई
- बेकिंग सोडा – एक चुटकी Optional
- घी – तलने के लिए
- इलायची -2
- केसर की कुछ पत्तियाँ
Instructions
मालपुआ रेसिपी बनाने की विधि
- स्टेप-बाय-स्टेप विधि
1 दूध तैयार करना (यदि आप मावा/खोया अपने दूध से बना रहे हैं)
- सबसे पहले अगर आप घरेलू मावा (खोया) बना रहे हैं तो 1.25 लीटर दूध धीमी आँच पर रखें। बीच-बीच में चलाते जाएँ ताकि नीचे जमे नहीं। दूध को तब तक उबालकर लगातार उबालें जब तक दूध लगभग आधा न रह जाए और गाढ़ा क्रीम जैसा टेक्सचर न बन जाए — यह प्रक्रिया आमतौर पर 30–45 मिनट ले सकती है।
- जब दूध गाढ़ा हो जाए तो चूल्हे से उतारकर ठंडा होने दें। यदि आप मावा नहीं बना रहे हैं तो सीधे सामान्य ताज़ा दूध का उपयोग करें।
- ध्यान: दूध को तेज आँच पर न छोड़ें — जलन या दही बनना समस्या पैदा कर सकता है।टिप: बाजार का खोया/मावा इस्तेमाल कर रहे हों तो 100–125 ग्राम मावा घिसकर बैटर में मिलाएँ — इससे मालपुआ और समृद्ध बनता है।
2.सूखी सामग्री को छानना और मिलाना
- एक बर्तन में मैदा और सूजी को एक साथ छान लें ताकि किसी प्रकार की गांठ ना रहे। छानने से बैटर हल्का रहेगा और मिक्सचर स्मूद बनेगा।
- इसमें इलायची पाउडर और पिसी सौंफ मिलाएँ।
- Optional: बैटर में बेकिंग सोडा की एक चुटकी डालने से परिणाम में हल्की फुलावट आती है — पर बहुत अधिक सोडा से स्वाद में कड़वाहट आ सकती है। अगर आप बेकिंग सोडा नहीं डालना चाहते तो ¼ चम्मच इन्स्टेंट यीस्ट गुनगुने पानी में घोलकर 10–15 मिनट पहले सक्रिय कर लें और बैटर में मिलाएँ (थोड़ी खमीर जैसी सुगंध और नरमी देगी)।
बैटर (घोल) बनाना — टेक्निक और संकेत
- अब छानी हुई सूखी सामग्री में धीरे-धीरे दूध डालें और अच्छे से फेंटें। यदि आपने मावा डाला है तो पहले मावा को दूध में अच्छी तरह मिला लें ताकि घोल समरूप हो।
- बैटर की वांछित कंसिस्टेंसी: यह थोड़ी गाढ़ी पैनकेक वाले घोल से पतला और पकोड़े के घोल से थोड़ा पतला होना चाहिए — यानी करछी से निकालने पर घोल धीरे-धीरे गिरना चाहिए, बहुत पतला न हो (जो फैलकर बहुत ज्यादा पतले घेरे बनाए)।
- तकनीकी संकेत: करछी पर घोल का एक गोला छोड़ें, वह 4–6 सेकंड में आकृति बनाए रखे और फैलना धीमा हो।
- बैटर में 2–3 बड़े चम्मच चीनी मिला दें (अल्प मात्रा) — इससे बैटर थोड़ा सहज खमीर जैसा व्यवहार करेगा और तलने पर रंग अच्छा आएगा।
- अच्छे से फेंटने के बाद बैटर को ढककर 1 से 2 घंटे कमरे के तापमान पर आराम दें। यह समय सूजी को फूलने देता है और बैटर का टेक्सचर स्मूद हो जाता है। बहुत अधिक देर तक न रखें (5–6 घंटे) वरना खटास आ सकती है।
- टिप: अगर आप तुरंत बनाना चाहते हैं तो कम से कम 30 मिनट छोड़ दें — पर 1–2 घंटे का आराम श्रेष्ठ परिणाम देता है।
- समस्या-समाधान: यदि बैटर बहुत गाढ़ा लगे तो थोड़ा दूध मिलाकर समायोजित करें; बहुत पतला होने पर 1–2 बड़े चम्मच बेसन/मैदा मिलाएँ।
चाशनी (शक्कर की चाशनी) बनाना
- एक मध्यम आकार के पैन में 1 कप चीनी और ½ कप पानी डालकर धीमी आँच पर रखें।
- चीनी को घुलने दें, बीच-बीच में ऊपर की झाग को हटाते जाएँ ताकि चाशनी साफ़ दिखे।
- जब चीनी पूरी तरह घुल जाए और चाशनी उबलने लगे, तो आँच को मध्यम-नीची रखें। चाशनी को एक तार (एक तार की कन्सिस्टेंसी) पर पकाना अच्छा होता है — यह पारंपरिक मालपुआ के लिए उपयुक्त है।
- तार की जाँच: चाशनी का एक छोटा सा भाग उँगली पर (या ठंडी चम्मच पर) लेकर देखें — यदि एक पतली तार बनती है और टूटती है तो एक-तार स्टेज है। (एक तार लगभग 104–106°C के आसपास होता है)।
- जब एक तार की स्थिति प्राप्त हो जाए तो गैस बंद कर दें और थोड़ा सा केसर/इलायची पाउडर डालें। चाशनी को गरम रखें — मालपुए में डालने के लिए चाशनी और मालपुआ दोनों गरम होने चाहिए।
- ध्यान: चाशनी को बहुत गाढ़ा न बनाएं; अगर गाढ़ी हो गई है तो उसमें थोड़ा गर्म पानी मिलाकर समायोजित कर लें और फिर गरम कर लें। चाशनी बहुत पतली भी न रखें, नहीं तो मालपुआ चाशनी पकाकर पानी जैसा हो सकता है।
घी/तेल गरम करना और तलने की तैयारी
- मध्यम आकार की कड़ाही में पर्याप्त घी डालें — गहरे तलने के लिए 3–4 इंच घी की परत रखें ताकि पुआ सही तरह तले। परंतु अगर कम घी रखें तो बैटर डूबकर ठीक से नहीं पक पाएगा।
- घी गरम करने के संकेत: करछी का एक छोटा हिस्सा घी में डालें — अगर चारों तरफ़ बुलबुले स्थिर रूप से उठें और तेज़ न हो तो ताप सही है। तापमान सामान्यतः मध्यम-निम्न होना चाहिए (लगभग 160–175°C) — बहुत अधिक गरम होने पर बाहरी हिस्सा जल जाएगा और अंदर कच्चा रहेगा।
- एक छोटा बैटर ड्रॉप करके टेस्ट करें — यदि बैटर तेजी से ऊपर उठकर सुनहरा हो रहा है और अंदर से कच्चापन न रह जाए तो ताप उपयुक्त है।
- टिप: यदि आपके पास थर्मामीटर है तो 160–170°C सर्वोत्तम। गैस पर आँच को मध्यम रखें और पूरे तलने के दौरान ताप नियंत्रित रखें।
6.मालपुए को तलना
- करछी या छोटी कटोरी से बैटर लें — पारंपरिक तरीके से करछी से घोल लेकर कड़ाही में गोल आकार में डालें। बैटर अपने आप गोलाकार फैल जाता है; यदि आप थोड़ा पतला और बड़े गोल पुआ चाहें तो करछी में बैटर और घी की सतह के बीच से धीरे बहा दें।
- घोल डालते ही बैटर के किनारों से छोटे बुलबुले बनना शुरू होते हैं — यह संकेत है कि तलना शुरू हो गया। धीमी से मध्यम आँच रखें।
- पहली साइड को तब तक तलें जब तक किनारा हल्का सुनहरा न हो और मध्य में छेद-छेद न दिखाई दें (लगभग 40–60 सेकंड, बैटर की मोटाई के अनुसार)। फिर स्पैचुला से धीरे पलटें और दूसरी साइड भी समान रूप से सुनहरी होने तक तलें (20–40 सेकंड)।
- बाहर से सुनहरा-नारंगी रंग और हल्की कुरकुराहट चाहिए, पर अंदर नरमी बनी रहे — इसे हासिल करने के लिए ताप को नियंत्रित रखना ज़रूरी है।
- तले हुए मालपुए को जाली चमचा से निकालकर किचन पेपर पर निकाल लें ताकि अतिरिक्त घी निकल जाए।
- समस्याएँ और सुधार:अगर बाहर जल रहा है और अंदर कच्चा है → आँच कम करें।अगर बहुत तेल सोख रहा है → बैटर बहुत पतला है; थोड़ा मैदा मिलाकर गाढ़ा करें या घी का ताप थोड़ा बढ़ाएँ पर संतुलित रखें।
- सही रंग पाने में देर हो रही है → घी का ताप थोड़ा बढ़ाएँ पर जलने से पहले ही निकालें।
चाशनी में भिगोना
- चाशनी और मालपुए दोनों गरम होने चाहिए — यदि चाशनी ठंडी होगी तो मालपुआ चाशनी उतनी नहीं अवशोषित करेगा। और यदि चाशनी बहुत गर्म और पतली होगी तो मालपुए बहुत गीले बन सकते हैं। आदर्श: चाशनी गर्म और मध्यम गाढ़ी हो।
- तले हुए मालपुए को गरम चाशनी में सीधे डालें — हर पुए को लगभग 30–60 सेकंड के लिए चाशनी में रखें ताकि वे अच्छे से भीग जाएँ। यदि आप रबड़ी के साथ परोस रहे हैं तो हल्का कम समय दें ताकि मालपुआ बहुत अधिक नरम न हो।
- चाशनी में डालते समय चाशनी का ताप लगभग 60–70°C जैसा महसूस होना चाहिए — ज्यादा गरम चाशनी और बहुत लम्बा भिगोना दोनों से मालपुआ बहुत गीला हो सकता है।
- टिप: चाशनी में भिगोने के बाद मालपुआ को प्लेट पर निकाल कर ऊपर से पिस्ता/बादाम छिड़कें। यदि आप रबड़ी डालने जा रहे हैं तो चाशनी में थोड़ी कम समय दें और रबड़ी पर रखें — इससे संतुलन अच्छा रहता है।
8 रबड़ी (यदि आप रबड़ी बनाना चाहें) — त्वरित विधि
- 500 मिली दूध को भारी तले की पैन में मध्यम आँच पर रखें। आँच धीमी रखें और दूध को तब तक उबालें जब तक आधा न रह जाए (30–40 मिनट)। बीच-बीच में किनारों से जमा मलाई को स्क्रैप कर वापस दूध में मिला दें।
- छलनी में छीनी हुई चीनी (4–6 टेबलस्पून) डालकर स्वाद अनुसार मीठा कर लें। अंत में इलायची पाउडर और कटे हुए मेवे डालें।
- रबड़ी को गाढ़ा और क्रीमी बनाना है; जब टेक्सचर गाढ़ा और चम्मच पर चढ़ने लायक हो जाए तो गैस बंद कर दें। रबड़ी को ठंडा होने पर मालपुए के साथ सर्व करें।
- नोट: रबड़ी बनाना समय-साध्य है; आप बाजार की थिक कंडेंस्ड मिल्क से भी त्वरित रबड़ी बना सकते हैं — 1 भाग कंडेंस्ड मिल्क + 2 भाग उबला और थोड़ा ठंडा किया हुआ दूध + इलायची/नूट्स मिलाकर।
सर्विंग और सजाावट
- गरम मालपुए को प्लेट पर रखें, ऊपर से थोड़ा केसर के तार, पिसा पिस्ता/बादाम और थोड़ी इलायची पाउडर छिड़कें।
- रबड़ी के साथ परोसें: प्लेट पर पहले रबड़ी बिछाएँ और ऊपर मालपुआ रखें — या अलग बाउल में रबड़ी दें ताकि खाने वाला अपनी पसंद अनुसार ले सके।
- कुछ लोकेशन में फिंगर फूड के रूप में छोटे मालपुए बनाए जाते हैं जो बच्चों और पार्टी में लोकप्रिय होते हैं।
सामान्य गलतियाँ और उनका त्वरित समाधान
- बैटर बहुत पतला → मैदा/सूजी थोड़ी मात्रा में मिलाएँ।
- बैटर ज़्यादा गाढ़ा → थोड़ा दूध मिलाकर पतलापन समायोजित करें।
- मालपुआ अंदर कच्चा और बाहर जल गया → आँच कम रखें; बैटर में बेकिंग सोडा कम करें।
- मालपुआ ज़्यादा तेल सोख रहा है → बैटर पतला है या घी बहुत ठंडा था; बैटर का गाढ़ापन जाँचें और तेल का ताप नियंत्रित करें।
- चाशनी बहुत गाढ़ी/कड़ी हो गई → उसमें थोड़ा गर्म पानी मिलाएँ और फिर गरम कर लें।
- चाशनी बहुत पतली है → थोड़ी और चीनी डालकर हल्की उबाल दें पर ध्यान रखें कि एक-तार से अधिक गाढ़ी न हो।
मालपुआ की प्रमुख वैराइटी
1. पारंपरिक बिहारी मालपुआ
दूध, मैदा, सूजी और घी से बनी यह सबसे आम वैराइटी है।
त्योहारों, खासकर छठ पूजा में इसका प्रसाद बनाना अनिवार्य है।
इसमें सौंफ और इलायची की हल्की खुशबू होती है।
2. ओड़िया मालपुआ (अमालू)
ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में भगवान को भोग के रूप में चढ़ाई जाने वाली डिश।
इसे आमतौर पर गुड़ और केले के साथ बनाया जाता है।
मंदिर परंपरा की वजह से इसे सात्त्विक प्रसाद माना जाता है।
3. राजस्थानी मालपुआ
राजस्थान का मालपुआ मोटा और गाढ़ा होता है।
इसे तलने के बाद सीधे रबड़ी के साथ परोसा जाता है।
केसर और पिस्ता की सजावट इसे शाही रूप देती है।
4. बंगाली मालपुआ (गुड़ वाला)
बंगाल में खासकर सर्दियों में खजूर के गुड़ (Date Palm Jaggery) से मालपुआ बनाया जाता है।
इसका स्वाद बेहद अलग और प्राकृतिक मिठास से भरा होता है।
5. केले वाला मालपुआ
बैटर में पका हुआ केला मिलाकर बनाया जाता है।
यह अधिक मुलायम और मीठा होता है।
खासकर बच्चों को बहुत पसंद आता है।
6. मावा मालपुआ
बैटर में खोया/मावा मिलाया जाता है।
यह अधिक समृद्ध और हलवाई-स्टाइल का स्वाद देता है।
शादी-ब्याह में खासतौर पर बनाया जाता है।
7. गुड़ का मालपुआ
चीनी की जगह गुड़ का उपयोग।
सेहत के लिहाज से बेहतर और स्वाद में देसी अंदाज़।
बिहार और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में यह बेहद लोकप्रिय है।
8. फ्यूज़न/मॉडर्न मालपुआ
आजकल होटल और रेस्टोरेंट्स में कई नए प्रयोग हो रहे हैं:
चॉकलेट मालपुआ (बैटर में कोको पाउडर और ऊपर चॉकलेट सॉस)चीज़ मालपुआ (रबड़ी की जगह क्रीम-चीज़ सॉस के साथ)
हनी मालपुआ (चाशनी की जगह शहद में डुबोकर)
9. फलों वाला मालपुआ
बैटर में सेब, नारियल या सूखे फलों का पेस्ट मिलाकर बनाया जाता है।
यह और भी पोषक और स्वादिष्ट बन जाता है।
10. त्योहार विशेष मालपुआ
छठ पूजा मालपुआ – सादगीपूर्ण, बिना ज्यादा सजावट वाला।
होली का मालपुआ – गाढ़ी चाशनी और रंग-बिरंगे मेवों से सजाया हुआ।
दीवाली मालपुआ – अक्सर रबड़ी और केसर के साथ।
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मालपुआ रेसिपी के स्वास्थ्य लाभ
1. ऊर्जा का उत्कृष्ट स्रोत
- मालपुआ में मैदा, सूजी, दूध और चीनी का उपयोग होता है।
- इन सभी में भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स और प्राकृतिक शर्करा होती है।
- यही कारण है कि त्योहारों के दौरान मालपुआ खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है।
- मेहनतकश लोगों या बच्चों के लिए यह तुरंत ऊर्जा देने वाला भोजन है।
2. प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर
- मालपुआ के बैटर में डाला गया दूध और मावा (खोया) प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है।
- दूध में मौजूद कैल्शियम हड्डियों और दाँतों को मजबूत बनाता है।
- प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत और विकास में सहायक होता है।
3. पाचन तंत्र पर प्रभाव
- मालपुआ में पारंपरिक रूप से सौंफ और इलायची डाली जाती है।
- सौंफ गैस, एसिडिटी और अपच को कम करने में मदद करती है।
- इलायची मुँह की दुर्गंध दूर करती है और पाचन में सुधार लाती है।
- इस प्रकार यह मिठाई स्वाद के साथ-साथ पाचन में भी सहायक होती है।
4. मानसिक सुकून और तनाव से राहत
- मीठा खाने से शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है।
- यह हार्मोन खुशी और सुकून की भावना पैदा करता है।
- त्योहारों में जब परिवार एक साथ बैठकर मालपुआ खाता है तो इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव और भी सकारात्मक हो जाता है।
5. रोग प्रतिरोधक क्षमता में सहायक
- मालपुआ में इस्तेमाल होने वाला दूध और घी शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करता है।
- दूध में मौजूद विटामिन A और B-12 रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं।
- घी आयुर्वेद के अनुसार शरीर को भीतर से पोषण देता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
6. हृदय स्वास्थ्य और ऊर्जा संतुलन
- सीमित मात्रा में घी शरीर में अच्छे वसा का स्तर बढ़ाता है।
- यह हृदय को स्वस्थ रखने और शरीर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
- मालपुआ में मौजूद सूखे मेवे (जैसे पिस्ता, बादाम) हृदय को मज़बूत करते हैं।
7. बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए लाभकारी
- बच्चों के लिए मालपुआ तुरंत ऊर्जा और स्वाद दोनों का स्रोत है।
- बुज़ुर्गों को दूध और घी से बनी यह मिठाई हड्डियों और शरीर को ताकत देती है।
- त्योहारों पर इसे “एनर्जी ट्रीट” माना जा सकता है।
8. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
- आयुर्वेद में घी और दूध से बने पकवानों को सात्त्विक आहार कहा गया है।
- सात्त्विक भोजन शरीर और मन दोनों को शांति देता है।
- सौंफ और इलायची जैसे मसाले वात-पित्त दोष को संतुलित करते हैं।
9. त्योहार और सामाजिक स्वास्थ्य लाभ
- मालपुआ खाने का असली आनंद त्योहारों में होता है।
- यह केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि मन और रिश्तों को भी पोषण देता है।
- जब परिवार और समाज साथ बैठकर मिठाइयाँ बाँटते हैं तो मानसिक स्वास्थ्य और सामूहिक जुड़ाव बढ़ता है।
10. सीमित सेवन क्यों ज़रूरी है
- मालपुआ तला हुआ और मीठा होता है, इसलिए अत्यधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज़ और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएँ बढ़ा सकता है।
- स्वास्थ्य लाभ तभी मिलेंगे जब इसे संतुलित मात्रा में खाया जाए।
11. आधुनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण
- यदि आप मालपुआ को हेल्दी बनाना चाहते हैं तोचीनी की जगह गुड़ या शहद का उपयोग करें।
- तले हुए की जगह कम घी में पैनकेक स्टाइल में सेंकें।
- बैटर में ओट्स या मल्टीग्रेन आटा मिलाएँ।
- इससे यह मिठाई आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप और भी स्वास्थ्यवर्धक बन जाएगी।
मालपुआ रेसिपी का पोषण चार्ट
मात्रा (प्रति 100 ग्राम मालपुआ)
| पोषक तत्व | मात्रा | स्वास्थ्य लाभ |
| ऊर्जा | 310–350 kcal | शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है |
| कार्बोहाइड्रेट्स | 40–45 g | शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत |
| प्रोटीन | 6–7 g | मांसपेशियों और कोशिकाओं की मरम्मत |
| वसा | 12–15 g | शरीर को आवश्यक अच्छे वसा प्रदान करता है |
| फाइबर | 1–2 g | पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है |
| कैल्शियम | 120–150 mg | हड्डियों और दाँतों को मज़बूत करता है |
| आयरन | 1–1.5 mg | हीमोग्लोबिन बनाने और खून की कमी रोकने में सहायक |
| विटामिन A | 80–100 IU | आँखों और त्वचा के लिए लाभकारी |
| विटामिन B-12 | 0.2–0.3 mcg | तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के लिए आवश्यक |
| पोटैशियम | 100–120 mg | हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप संतुलन |
| मैग्नीशियम | 15–20 mg | मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करता है |
मालपुआ रेसिपी FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. मालपुआ रेसिपी किस राज्य की प्रसिद्ध मिठाई है
A मालपुआ रेसिपी भारत के कई राज्यों में बनाई जाती है, लेकिन यह विशेष रूप से बिहार, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान और बंगाल में लोकप्रिय है। बिहार में छठ पूजा, ओडिशा में जगन्नाथ मंदिर और राजस्थान में रबड़ी-मालपुआ का खास महत्व है।
Q2. मालपुआ रेसिपीऔर पुआ में क्या अंतर है
A पुआ साधारणत: गुड़, आटा और दूध से बना पकवान है, जबकि मालपुआ रेसिपी इसका उन्नत रूप है जिसमें मैदा, सूजी, दूध, इलायची और कभी-कभी रबड़ी का प्रयोग किया जाता है।
Q3. क्या मालपुआ रेसिपी बनाने के लिए केवल घी का ही इस्तेमाल करना ज़रूरी है
पारंपरिक रूप से मालपुआ रेसिपी घी में तला जाता है क्योंकि इससे इसका स्वाद और सुगंध दोनों बढ़ जाते हैं। लेकिन आप चाहें तो इसे तेल या कम घी में पैन फ्राई भी कर सकते हैं।
Q4. मालपुआ के बैटर को कितनी देर आराम देना चाहिए
A बैटर को कम से कम 1–2 घंटे आराम देना चाहिए। इससे सूजी फूल जाती है और मालपुआ नरम व फूले-फूले बनते हैं।
Q5. क्या मालपुआ को पहले से बनाकर स्टोर किया जा सकता है
A हाँ, लेकिन यह सबसे अच्छा ताज़ा-ताज़ा खाने में लगता है।अगर आपको स्टोर करना हो तो एयरटाइट कंटेनर में फ्रिज में रखें।1–2 दिन तक सुरक्षित रहता है।दोबारा खाने से पहले हल्का गरम कर लें।
Q6. क्या डायबिटीज़ के मरीज मालपुआ खा सकते हैं
A सामान्य चीनी वाले मालपुए डायबिटीज़ मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।लेकिन वे चाहें तो गुड़, शुगर-फ्री या शहद से बने मालपुए सीमित मात्रा में खा सकते हैं।
Q7. मालपुआ को कुरकुरा कैसे बनाया जाए
A बैटर में थोड़ी सूजी मिलाने और मध्यम आँच पर तलने से मालपुआ कुरकुरा बनता है।
Q8. क्या मालपुआ केवल मीठा होता है
A परंपरागत रूप से मालपुआ मीठा ही होता है, लेकिन कुछ आधुनिक वैराइटी जैसे हनी मालपुआ या चॉकलेट मालपुआ में मिठास का स्तर अलग-अलग रखा जाता है।
Q9. मालपुआ किसके साथ सबसे स्वादिष्ट लगता है
A मालपुआ अकेले भी स्वादिष्ट है, लेकिन रबड़ी के साथ इसका स्वाद दोगुना हो जाता है। राजस्थान और यूपी में अक्सर मालपुआ रबड़ी के साथ परोसा जाता है।
Q10. क्या मालपुआ बनाने में अंडा डाला जाता है
A भारत के अधिकतर हिस्सों में मालपुआ शाकाहारी रूप में बनाया जाता है।लेकिन कुछ जगहों (जैसे मुस्लिम परिवारों में रमज़ान के दौरान) अंडे वाला मालपुआ भी बनाया जाता है।
Q11. मालपुआ और इमरती/जलेबी में क्या अंतर है
A मालपुआ बैटर को तवे या कढ़ाई में डालकर तला जाता है और फिर चाशनी में डुबोया जाता है, जबकि जलेबी का घोल कपड़े या पाइप से डालकर कुंडली जैसी आकृति में तला जाता है।
Q12. मालपुआ की हेल्दी वैराइटी कैसे बनाई जा सकती है
A चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें।घी में डीप फ्राई करने की बजाय कम तेल में पैनकेक स्टाइल में सेंकें।बैटर में ओट्स, मल्टीग्रेन आटा या केले मिलाएँ।
Q13. मालपुआ बनाने में सबसे आम गलती क्या होती है
A सबसे आम गलती है – बैटर का गाढ़ापन सही न होना।बहुत पतला बैटर होने पर मालपुआ टूट जाता है।बहुत गाढ़ा बैटर होने पर मालपुआ अंदर से कच्चा रह जाता है।
Q14. क्या मालपुआ त्योहारों पर ही खाया जाता है
A नहीं, मालपुआ को किसी भी समय बनाया जा सकता है।लेकिन इसका सबसे ज़्यादा महत्व छठ पूजा, होली और रमज़ान जैसे अवसरों पर होता है।
Q15. क्या मालपुआ बच्चों को खिलाना सही है
A हाँ, लेकिन सीमित मात्रा में।क्योंकि इसमें दूध, घी और मेवे होते हैं जो बच्चों को ऊर्जा देते हैं।बस ध्यान रखें कि बहुत अधिक तला हुआ और मीठा एक साथ न दें।

मालपुआ रेसिपी के अंतिम निष्कर्ष
मालपुआ केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक और सांस्कृतिक धरोहर है। बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बंगाल से लेकर पूरे देश में यह त्योहारों और खास मौकों पर बनाकर परिवार और समाज को जोड़ने का काम करता है। इसकी खुशबू, स्वाद और नरमाहट हर किसी को लुभा लेती है।
मालपुआ बनाने की विधि सरल है, और इसमें प्रयोग होने वाली सामग्री भी आसानी से हर घर में मिल जाती है। चाहे आप इसे दूध-मैदा से बनाएं, खोए के साथ, सूजी या केले के साथ – हर वैराइटी अपने आप में खास है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से यह ऊर्जा, प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर है। हालांकि इसमें चीनी और घी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।त्योहारों पर यदि आप अपने परिवार और मेहमानों को खुश करना चाहते हैं तो घर पर बनाए हुए मालपुआ से बेहतर विकल्प कोई और नहीं। यह सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि परंपरा और स्वाद का संगम है, जो हर निवाले के साथ आपको भारतीय संस्कृति से जोड़ देता है।