“दुर्गा पूजा 2025 के लिए स्पेशल रेसिपी – भोग वाली खिचड़ी। जानें इसका इतिहास, पोषण चार्ट, फायदे और स्टेप-बाय-स्टेप बनाने की विधि।”
भोग वाली खिचड़ी (खिचुरी) का परिचय
दुर्गा पूजा के अवसर पर जब माँ दुर्गा की आराधना की जाती है, तो पूजा-अर्चना के साथ-साथ भोग का भी विशेष महत्व होता है। भोग का अर्थ है – माता को अर्पित किया जाने वाला शुद्ध और सत्विक भोजन, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में भक्तगण ग्रहण करते हैं।
इन्हीं विशेष व्यंजनों में से एक है – भोग वाली खिचड़ी (खिचुरी)। यह बंगाल, बिहार, ओडिशा और असम में दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक अवसरों पर बनाई जाती है।
- यह खिचड़ी साधारण खिचड़ी से बिल्कुल अलग होती है।
- इसमें भुनी हुई मूंग दाल और चावल का प्रयोग होता है।
- साथ में मौसमी सब्जियाँ, घी और हल्के मसाले डाले जाते हैं।
- प्याज और लहसुन का प्रयोग इसमें नहीं होता, जिससे यह पूरी तरह सात्त्विक भोजन बन जाता है।
विशेषता
- भोग वाली खिचड़ी सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि भक्ति और परंपरा का प्रतीक है।
- इसे माँ दुर्गा को अर्पित करने से पहले बड़े स्नेह और शुद्धता से बनाया जाता है।
- इसका स्वाद हल्का होते हुए भी बेहद लाजवाब और सुगंधित होता है।
- पूजा पंडालों में जब गरमा-गरम खिचुरी, लाबड़ा (मिक्स सब्जी), टमाटर की मीठी चटनी और पायेश (खीर) के साथ परोसी जाती है, तो उसका आनंद और भी बढ़ जाता है।
भोग वाली खिचड़ी (खिचुरी) का इतिहास
भोग वाली खिचड़ी का इतिहास भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। भारत में खिचड़ी को सदियों से सात्त्विक और पवित्र भोजन माना जाता रहा है। खासकर बंगाल और बिहार में दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक अवसरों पर बनने वाली भोग वाली खिचड़ी (खिचुरी) का महत्व और भी विशेष है।
वैदिक काल में खिचड़ी
- खिचड़ी का उल्लेख प्राचीन वैदिक साहित्य और आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।
- उस समय इसे “क्षीरोदन” या “ओडन” कहा जाता था, जो चावल और दाल को मिलाकर बनाया जाता था।
- इसे पंचमहायज्ञ और यज्ञ हवन के बाद प्रसाद के रूप में बांटा जाता था।
बंगाल में खिचुरी का प्रचलन
- बंगाल में खिचड़ी को “खिचुरी” कहा जाता है।
- 16वीं–17वीं शताब्दी में जब दुर्गा पूजा का प्रचलन तेजी से बढ़ा, तब से खिचुरी को पूजा में नैवेद्य (भोग) के रूप में चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
- खासकर गोविंदभोग चावल और मूंग दाल से बनी खिचुरी माँ दुर्गा को अर्पित की जाने लगी।
- इसमें सब्जियाँ डालकर इसे लाबड़ा और पायेश के साथ परोसा जाने लगा।
ऐतिहासिक किस्से
- कहते हैं कि नवाब मुर्शिदकुली खान (बंगाल के गवर्नर) के समय खिचुरी को शाही व्यंजन का दर्जा मिला।
- ब्रिटिश काल में भी बंगाल के पंडालों में खिचुरी प्रसाद का वितरण होता था और यह सामूहिक भोजन का प्रतीक बन गया।
- यह परंपरा आज भी वैसी ही जारी है, जब हजारों लोग पंडालों में बैठकर एक साथ खिचुरी-भोग का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
धार्मिक महत्व
- खिचुरी को सात्त्विक भोजन माना जाता है क्योंकि इसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं होता।
- मूंग दाल और चावल का संयोजन शरीर को संतुलित पोषण देता है और आसानी से पच जाता है।
- दुर्गा पूजा के दौरान इसे शुद्धता, एकता और सामूहिकता का प्रतीक माना जाता है।
इस प्रकार, भोग वाली खिचड़ी का इतिहास सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, संस्कृति और समाज को जोड़ने वाली परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
INGREDIENTS
- गोविंदभोग/बासमती चावल – 1 कप
- मूंग दाल – ½ कप (सूखा भुना हुआ)
- आलू – 2 मध्यम (क्यूब्स में कटे हुए)
- फूलगोभी – 1 कप (छोटे टुकड़े)
- गाजर – 1 (कटे हुए टुकड़े)
- मटर – ½ कप
- कद्दू – ½ कप
- टमाटर – 1 (बारीक कटा हुआ, वैकल्पिक)
- तेजपत्ता – 2
- जीरा – 1 चम्मच
- दालचीनी – 1 टुकड़ा
- लौंग – 3–4
- छोटी इलायची – 2
- अदरक – 1 इंच टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)
- हरी मिर्च – 2 (चीरा लगाया हुआ)
- हल्दी पाउडर – ½ चम्मच
- लाल मिर्च पाउडर – ½ चम्मच
- नमक – स्वादानुसार
- देसी घी – 3–4 बड़े चम्मच
- पानी – लगभग 4–5 कप
भोग वाली खिचड़ी बनाने से पहले तैयारी
Step 1: मूंग दाल भूनना
1. एक पैन गरम करें।
2. मूंग दाल डालें और बिना तेल के हल्की सुनहरी और सुगंधित होने तक भूनें।
3. इससे दाल की खुशबू और स्वाद और भी गहरा हो जाएगा।
4. भूनने के बाद इसे ठंडा करके अच्छे से धो लें।
Step 2: चावल धोना
1. गोविंदभोग या बासमती चावल को साफ पानी से 2–3 बार धो लें।
2. 15–20 मिनट तक पानी में भिगोकर रखें।
3. भिगोने से पकाने पर चावल खिले-खिले और स्वादिष्ट बनते हैं।
Step 3: सब्जियाँ काटना
1. आलू, गाजर, कद्दू और फूलगोभी को धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें।
2. मटर को छीलकर अलग रखें।
3. ध्यान रखें कि सब्जियाँ ज्यादा बड़ी न हों, ताकि खिचड़ी में अच्छी तरह मिल जाएँ।
भोग वाली खिचड़ी बनाने की विधि
Step 4: सब्जियों को हल्का फ्राई करना
1. एक कड़ाही में 1 चम्मच घी गरम करें।
2. आलू और फूलगोभी डालकर हल्का सुनहरा होने तक फ्राई करें।
3. इससे सब्जियाँ खिचड़ी में गलने की बजाय स्वादिष्ट और अलग-अलग दिखेंगी।
4. इन्हें अलग निकालकर रख लें।
Step 5: मसाले तड़काना
1. एक बड़े पैन या कुकर में 2 बड़े चम्मच घी गरम करें।
2. इसमें तेजपत्ता, जीरा, दालचीनी, लौंग और इलायची डालें।
3. खुशबू आने लगे तो अदरक और हरी मिर्च डालकर 1 मिनट भूनें।
Step 6: दाल पकाना
1. अब इसमें भुनी और धुली मूंग दाल डालें।
2. 2–3 मिनट धीमी आंच पर भूनें।
3. 2 कप पानी डालें और नमक व हल्दी डालकर दाल को आधा पकने तक उबालें।
Step 7: चावल और सब्जियाँ मिलाना
1. अब इसमें भीगे हुए चावल डालें।
2. साथ ही पहले से फ्राई की हुई सब्जियाँ (आलू, फूलगोभी, गाजर, कद्दू, मटर) डालें।
3. टमाटर भी डाल सकते हैं (वैकल्पिक)।
4. 2–3 कप पानी और डालें।
5. हल्का लाल मिर्च पाउडर डालकर मिलाएँ।
Step 8: धीमी आंच पर पकाना
1. ढककर 15–20 मिनट धीमी आंच पर पकने दें।
2. बीच-बीच में चलाते रहें ताकि नीचे न लगे।
3. जब चावल और दाल गल जाएँ और खिचड़ी हल्की गाढ़ी हो जाए तो गैस बंद कर दें।
Step 9: अंतिम टच
1. ऊपर से 1 चम्मच घी डालें और अच्छी तरह मिला लें।
2. ढककर 5 मिनट के लिए रख दें।
3. खुशबू और स्वाद और भी बढ़ जाएगा।
परोसने का तरीका
भोग वाली खिचड़ी को सामान्यत: इनके साथ परोसा जाता है –लाबड़ा (मिक्स वेज करी)टमाटर की मीठी चटनीपायेश (चावल की खीर)बिगन भाजा (बैंगन का फ्राई)
बनाने में ध्यान रखने योग्य बातें
दाल को हल्का भूनना ज़रूरी है, वरना स्वाद फीका लगेगा।
पानी की मात्रा 2:1 रखें (चावल + दाल = पानी दोगुना) ताकि खिचड़ी न ज्यादा सूखी बने, न ज्यादा पतली।
मसाले बहुत तेज न डालें, क्योंकि भोग वाली खिचड़ी हमेशा हल्की और सात्त्विक होती है।
अगर कुकर में बना रहे हैं तो 2–3 सीटी काफी हैं।

भोग वाली खिचड़ी
Equipment
- भोग वाली खिचड़ी
Ingredients
- गोविंदभोग/बासमती चावल – 1 कप
- मूंग दाल – ½ कप सूखा भुना हुआ
- आलू – 2 मध्यम क्यूब्स में कटे हुए
- फूलगोभी – 1 कप छोटे टुकड़े
- गाजर – 1 कटे हुए टुकड़े
- मटर – ½ कप
- कद्दू – ½ कप
- टमाटर – 1 बारीक कटा हुआ, वैकल्पिक
- तेजपत्ता – 2
- जीरा – 1 चम्मच
- दालचीनी – 1 टुकड़ा
- लौंग – 3–4
- छोटी इलायची – 2
- अदरक – 1 इंच टुकड़ा कद्दूकस किया हुआ
- हरी मिर्च – 2 चीरा लगाया हुआ
- हल्दी पाउडर – ½ चम्मच
- लाल मिर्च पाउडर – ½ चम्मच
- नमक – स्वादानुसार
- देसी घी – 3–4 बड़े चम्मच
- पानी – लगभग 4–5 कप
Instructions
भोग वाली खिचड़ी बनाने की विधि
Step 4: सब्जियों को हल्का फ्राई करना
- एक कड़ाही में 1 चम्मच घी गरम करें।
- आलू और फूलगोभी डालकर हल्का सुनहरा होने तक फ्राई करें।
- इससे सब्जियाँ खिचड़ी में गलने की बजाय स्वादिष्ट और अलग-अलग दिखेंगी।
- इन्हें अलग निकालकर रख लें।
Step 5: मसाले तड़काना
- एक बड़े पैन या कुकर में 2 बड़े चम्मच घी गरम करें।
- इसमें तेजपत्ता, जीरा, दालचीनी, लौंग और इलायची डालें।
- खुशबू आने लगे तो अदरक और हरी मिर्च डालकर 1 मिनट भूनें।
Step 6: दाल पकाना
- अब इसमें भुनी और धुली मूंग दाल डालें।
- 2–3 मिनट धीमी आंच पर भूनें।
- 2 कप पानी डालें और नमक व हल्दी डालकर दाल को आधा पकने तक उबालें।
Step 7: चावल और सब्जियाँ मिलाना
- अब इसमें भीगे हुए चावल डालें।
- साथ ही पहले से फ्राई की हुई सब्जियाँ (आलू, फूलगोभी, गाजर, कद्दू, मटर) डालें।
- टमाटर भी डाल सकते हैं (वैकल्पिक)।
- 2–3 कप पानी और डालें।
- हल्का लाल मिर्च पाउडर डालकर मिलाएँ।
Step 8: धीमी आंच पर पकाना
- ढककर 15–20 मिनट धीमी आंच पर पकने दें।
- बीच-बीच में चलाते रहें ताकि नीचे न लगे।
- जब चावल और दाल गल जाएँ और खिचड़ी हल्की गाढ़ी हो जाए तो गैस बंद कर दें।
Step 9: अंतिम टच
- ऊपर से 1 चम्मच घी डालें और अच्छी तरह मिला लें।
- ढककर 5 मिनट के लिए रख दें।
- खुशबू और स्वाद और भी बढ़ जाएगा।
परोसने का तरीका
- भोग वाली खिचड़ी को सामान्यत: इनके साथ परोसा जाता है –लाबड़ा (मिक्स वेज करी)टमाटर की मीठी चटनीपायेश (चावल की खीर)बिगन भाजा (बैंगन का फ्राई)
- बनाने में ध्यान रखने योग्य बातें
- दाल को हल्का भूनना ज़रूरी है, वरना स्वाद फीका लगेगा।
- पानी की मात्रा 2:1 रखें (चावल + दाल = पानी दोगुना) ताकि खिचड़ी न ज्यादा सूखी बने, न ज्यादा पतली।
- मसाले बहुत तेज न डालें, क्योंकि भोग वाली खिचड़ी हमेशा हल्की और सात्त्विक होती है।
- अगर कुकर में बना रहे हैं तो 2–3 सीटी काफी हैं।
भोग वाली खिचड़ी की वैराइटी
1. बंगाली भोगेर खिचुरी
- इसमें गोविंद भोग चावल और मूंग दाल का उपयोग होता है।
- देसी घी में जीरा, तेजपत्ता, अदरक और हल्के मसालों का तड़का दिया जाता है।
- आलू, फूलगोभी, मटर जैसी सब्ज़ियाँ भी डाली जाती हैं।
- यह दुर्गा पूजा पंडालों में सबसे लोकप्रिय खिचड़ी है।
2. उत्तर भारतीय सात्विक खिचड़ी
- इसमें चावल और मूंग दाल को साधारण तरीके से पकाया जाता है।
- प्याज-लहसुन का प्रयोग नहीं होता।
- हल्की सब्ज़ियाँ (गाजर, मटर, आलू) डाली जाती हैं।
- इसे साधारण घी-जीरा तड़के के साथ परोसा जाता है।
3. नवदुर्गा प्रसाद खिचड़ी
- यह वैराइटी खासतौर पर नवरात्रि के नौ दिनों में बनाई जाती है।
- इसमें सेंधा नमक का प्रयोग होता है।
- सब्ज़ियों की जगह कभी-कभी सिर्फ आलू और शकरकंद डाले जाते हैं।
- इसे उपवास रखने वाले लोग प्रसाद के रूप में खाते हैं।
4. भोग वाली मिश्रित सब्ज़ी खिचड़ी
- इसमें चावल और दाल के साथ कई मौसमी सब्ज़ियाँ डाली जाती हैं।
- हल्का मसाला और घी का प्रयोग किया जाता है।
- यह अधिक पौष्टिक और रंगीन खिचड़ी होती है।
5. नारियल वाली भोग खिचड़ी
- इस वैराइटी में भुनी हुई मूंग दाल और चावल के साथ नारियल का स्वाद जोड़ा जाता है।
- दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में यह पूजा में बनाई जाती है।
- इसमें हल्का मीठापन और खास सुगंध होती है।
6. सादा भोग खिचड़ी
- इसमें सिर्फ मूंग दाल और चावल होते हैं।
- कोई मसाला, कोई सब्ज़ी नहीं – सिर्फ घी, हल्दी और नमक।
- इसे पूजा के प्रसाद में पवित्र और सात्विक माना जाता है।
इस तरह, अलग-अलग जगहों पर दुर्गा पूजा की खिचड़ी अलग अंदाज़ में बनती है, लेकिन सभी में एक बात समान है – सात्विकता, हल्के मसाले और प्रसाद का पवित्र स्वाद।
भोग वाली खिचड़ी (खिचुरी) – स्वास्थ्य लाभ
1. ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत
- भोग वाली खिचड़ी में चावल और दाल का मिश्रण होता है।
- चावल शरीर को पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट उपलब्ध कराता है जो तुरंत ऊर्जा में बदल जाता है।
- पूजा और व्रत के समय शरीर को हल्का लेकिन ऊर्जा से भरपूर आहार चाहिए, जिसे खिचड़ी पूरी तरह पूरा करती है।
2. प्रोटीन का अच्छा स्रोत
- मूंग दाल और अन्य दालें प्रोटीन से भरपूर होती हैं।
- यह प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत, नई कोशिकाओं के निर्माण और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है।
- शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का उत्तम स्रोत है।
3. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद
- खिचड़ी हल्की और आसानी से पचने वाली डिश है।
- इसमें मसाले कम होते हैं और दाल-चावल एक साथ पककर मुलायम हो जाते हैं।
- फाइबर युक्त सब्ज़ियों (जैसे गाजर, मटर, आलू) के जुड़ने से कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएँ कम होती हैं।
- पूजा के दौरान लगातार भारी भोजन न लेने से यह पाचन को संतुलित रखती है।
4. सात्विक और शुद्ध आहार
- भोग वाली खिचड़ी बिना प्याज-लहसुन और ज्यादा मसाले के बनाई जाती है।
- यह मन को शांत और शरीर को हल्का रखती है।
- सात्विक भोजन मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होता है।
5. रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है
- खिचड़ी में मौजूद विटामिन C (सब्ज़ियों से) और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।
- आयरन, मैग्नीशियम और जिंक जैसे खनिज शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
- नियमित सेवन से मौसमी बीमारियों से बचाव में सहायता मिलती है।
6. हृदय और ब्लड प्रेशर के लिए लाभकारी
- खिचड़ी में कम तेल और घी का उपयोग किया जाता है, जिससे यह हृदय के लिए हल्की होती है।
- इसमें पोटैशियम की मात्रा अच्छी होती है, जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद करता है।
- कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए यह एक बेहतर विकल्प है।
7. वजन नियंत्रित करने में मददगार
- भोग वाली खिचड़ी कैलोरी में कम और पोषण में अधिक होती है।
- यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है जिससे बार-बार खाने की आदत कम होती है।
- व्रत या पूजा के दौरान हल्का आहार लेने वालों के लिए यह वजन घटाने/बनाए रखने में उपयोगी साबित हो सकती है।
8. हड्डियों और दाँतों के लिए फायदेमंद
- खिचड़ी में मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों और दाँतों को मजबूत बनाते हैं।
- साथ ही इसमें डाला गया घी शरीर में विटामिन D को अवशोषित करने में मदद करता है।
9. तनाव कम करने में सहायक
- सात्विक खिचड़ी खाने से शरीर को हल्कापन और ताजगी महसूस होती है।
- यह मस्तिष्क को शांत करने और तनाव को कम करने में सहायक है।
- पूजा के दौरान मानसिक शांति और सकारात्मक सोच बनाए रखने के लिए यह भोजन सर्वोत्तम है।
10. बच्चों और बुजुर्गों के लिए उपयुक्त
- खिचड़ी मुलायम और आसानी से पचने वाली होती है, इसलिए यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए आदर्श भोजन है।
- इसमें मौजूद प्रोटीन और विटामिन बच्चों की वृद्धि में और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
11. डिटॉक्स और शुद्धिकरण में सहायक
- पूजा के समय सात्विक खिचड़ी का सेवन शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में सहायक होता है।
- यह हल्का भोजन शरीर को आराम देता है और पाचन क्रिया को सुधारता है।
12. डायबिटीज़ और पेट की बीमारियों के लिए लाभकारी
- भोग वाली खिचड़ी में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह डायबिटीज़ रोगियों के लिए भी सुरक्षित है।
- हल्की और फाइबर युक्त होने के कारण यह अल्सर और गैस्ट्रिक समस्या में भी राहत देती है।
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भोग वाली खिचड़ी – पोषण चार्ट
(प्रति 200g सर्विंग)
| पोषक तत्व | मात्रा | स्वास्थ्य लाभ |
| कैलोरी | 220–250 kcal | ऊर्जा प्रदान करती है |
| कार्बोहाइड्रेट | 40–45 g | शरीर को ऊर्जा देता है |
| प्रोटीन | 7–9 g | मांसपेशियों और ऊतक की मरम्मत |
| वसा | 4–6 g | शरीर को स्वस्थ रखने और ऊर्जा भंडारण में सहायक |
| फाइबर | 4–5 g | पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है |
| विटामिन A | 50–80 mcg | आंखों और त्वचा के लिए लाभकारी |
| विटामिन C | 8–12 mg | इम्युनिटी बढ़ाता है |
| कैल्शियम | 40–50 mg | हड्डियों को मजबूत करता है |
| आयरन (Iron) | 2–3 mg | खून में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखता है |
| मैग्नीशियम | 30–35 mg | मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम के लिए फायदेमंद |
| पोटैशियम | 180–200 mg | ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद करता है |
भोग वाली खिचड़ी (खिचुरी) – FAQs
Q1. भोग वाली खिचड़ी क्या होती है
A भोग वाली खिचड़ी दुर्गा पूजा और धार्मिक अवसरों पर बनाई जाने वाली सात्त्विक खिचड़ी है। इसे मूंग दाल, चावल और सब्जियों के साथ बनाया जाता है और इसमें प्याज-लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता।
Q2. साधारण खिचड़ी और भोग वाली खिचड़ी में क्या अंतर है
A साधारण खिचड़ी में प्याज, लहसुन और मसाले डाले जाते हैं।भोग वाली खिचड़ी पूरी तरह सात्त्विक होती है, इसमें केवल हल्के मसाले और घी का उपयोग होता है।
Q3. भोग वाली खिचड़ी के साथ क्या परोसा जाता है
A लाबड़ा (मिक्स वेज करी)टमाटर की मीठी चटनीपायेश (खीर)बिगन भाजा (बैंगन का फ्राई)मिठाई जैसे रसगुल्ला या संदेश
Q4. खिचड़ी में किस दाल का उपयोग होता है
A भोग वाली खिचड़ी में आमतौर पर मूंग दाल का उपयोग होता है। इसे पहले हल्का भून लिया जाता है, जिससे स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है।
Q5. क्या इसमें प्याज और लहसुन डाला जा सकता है
A नहीं ।भोग वाली खिचड़ी पूजा प्रसाद के लिए बनाई जाती है, इसलिए इसमें प्याज और लहसुन नहीं डाला जाता।
Q6. कौन सा चावल खिचड़ी के लिए सबसे अच्छा होता है
A परंपरागत रूप से गोविंदभोग चावल का उपयोग किया जाता है।अगर यह उपलब्ध न हो तो बासमती या सामान्य छोटे दाने वाले चावल भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
Q7. क्या भोग वाली खिचड़ी व्रत में खा सकते हैं
A हाँ ।क्योंकि यह हल्की और सात्त्विक होती है, इसलिए व्रत या उपवास में इसे खाया जा सकता है।
Q8. खिचड़ी बनाने में कितना समय लगता है?तैयारी का समय: 15 मिनटपकाने का समय: 25–30 मिनटकुल समय: 40–45 मिनट
A 9. क्या इसे कुकर में बनाया जा सकता है
A।अगर प्रेशर कुकर में बनाएँ तो 2–3 सीटी में खिचड़ी आसानी से तैयार हो जाती है।
Q10. क्या भोग वाली खिचड़ी सेहत के लिए अच्छी है
A बिल्कुल ।यह आसानी से पचने वाली, पौष्टिक और संतुलित भोजन है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और विटामिन सब कुछ मौजूद होता है।
अंतिम निष्कर्ष
दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर बनाई जाने वाली भोग वाली खिचड़ी केवल भोजन ही नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक है। यह रेसिपी सात्विकता, पवित्रता और पोषण का अद्भुत संगम है।
- इसमें चावल, दाल, सब्ज़ियाँ और घी का ऐसा संतुलन है जो इसे पूर्ण आहार बनाता है।
- यह हल्की, सुपाच्य और स्वादिष्ट है, जिससे हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से खा सकता है।
- पूजा के दौरान प्रसाद के रूप में खाई जाने वाली यह खिचड़ी मन को शांति और आत्मा को संतुष्टि प्रदान करती है।
- इसमें मौजूद पोषण तत्व शरीर को ऊर्जा और रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं।
- धार्मिक दृष्टि से यह सात्विक भोजन मन को पवित्र, संयमित और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
इसीलिए, भोग वाली खिचड़ी सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि भक्ति, परंपरा और स्वास्थ्य का अनमोल प्रसाद है।नवरात्रि और दुर्गा पूजा के पावन दिनों में इसका सेवन न केवल शरीर को पोषण देता है बल्कि आध्यात्मिक सुख भी प्रदान करता है।