केला के कंद का सब्जी

स्वादिष्ट केला के कंद का सब्जी

केला के कंद का सब्जी का परिचय

(चय:केले का कंद, जिसे हिंदी में “थोड़ी” या “कच्चा तना” भी कहा जाता है, पौधे का वह हिस्सा होता है जो मिट्टी के नीचे या पास रहता है। यह हिस्सा रेशेदार, सख्त और औषधीय गुणों से भरपूर होता है। भारत के कई राज्यों में, विशेषकर बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और दक्षिण भारत में केले के कंद की सब्ज़ी पारंपरिक व्यंजनों में गिनी जाती है।

यह सब्ज़ी स्वाद में हल्की कसैली और मिट्टी जैसी सोंधी महक लिए होती है। सही मसालों और विधि से तैयार की गई केला कंद की सब्ज़ी न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि शरीर को कई प्रकार के रोगों से बचाने में सहायक भी होती है।-

खास बातें:यह सब्ज़ी किडनी स्टोन, पाचन विकार, मधुमेह और बवासीर जैसी समस्याओं में लाभकारी मानी जाती है।इसे चना दाल, सरसों के बीज, अदरक, लहसुन और टमाटर के साथ पकाया जाता है जिससे स्वाद और पौष्टिकता दोनों बढ़ जाती है।उपवास और व्रत के दिनों में भी इसकी हल्की सब्ज़ी बनाई जाती है।–

केला के कंद का सब्जी का इतिहास

केला भारत का प्राचीन और महत्वपूर्ण फल है, लेकिन इसके कंद का उपयोग भी सदियों से सब्ज़ियों और औषधीय रूप में होता आ रहा है। केला के पेड़ को भारतीय संस्कृति में “पूर्ण पौधा” माना जाता है, क्योंकि इसका हर हिस्सा – फल, फूल, पत्ता, तना और कंद – किसी न किसी रूप में प्रयोग में आता है।

प्राचीन उपयोग और इतिहास

1. वैदिक काल से प्रचलित

आयुर्वेद ग्रंथों में केला के कंद का उल्लेख “औषधीय भोजन” के रूप में मिलता है। इसे पाचन सुधारने, किडनी को स्वस्थ रखने और शरीर को ठंडक प्रदान करने वाला माना गया है।

2. दक्षिण भारत की परंपरा

दक्षिण भारत (तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश) में केले के तने और कंद से बनने वाली सब्ज़ियाँ और कोशंबरी (सलाद) का ज़िक्र प्राचीन साहित्य में मिलता है। इन्हें मंदिर प्रसाद और आयुर्वेदिक भोजन में शामिल किया जाता था।

3. पूर्वी भारत में उपयोग

बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल में केले के कंद की सब्ज़ी परंपरागत भोजन का हिस्सा रही है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसे मौसमी डिश के रूप में खाया जाता था।

4. औषधीय महत्व

प्राचीन चिकित्सक इसे मूत्रवर्धक, कब्ज दूर करने वाला और शरीर की गर्मी कम करने वाला मानते थे।

लोकजीवन और पाक इतिहास

ग्रामीण भारत में जब केले के पौधे से फल काट लिया जाता था, तो उसके कंद (तने के नीचे का भाग) को बर्बाद नहीं किया जाता था। इसे काटकर सब्ज़ी, चटनी, सूप और आचार बनाने की परंपरा रही है।

त्योहारों और उपवासों के समय इसे सात्विक भोजन के रूप में खाया जाता था।धीरे-धीरे इसकी रेसिपी राज्यों के अनुसार अलग-अलग रूप लेती गई।बिहार और यूपी – इसमें सरसों का तेल और मसाले डालकर सूखी सब्ज़ी बनाई जाती है।

बंगाल – “থোর ঘন্টो (Thor Ghonto)” नाम से केला तने की करी प्रसिद्ध है।

केरल – इसे “Vazha Thandu Thoran” कहा जाता है, जहाँ इसे नारियल और करी पत्ते के साथ बनाया जाता है।

तमिलनाडु – “Vazhaithandu Poriyal” और “Vazhaithandu Juice” विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।

संस्कृतिक महत्व

केला का पौधा भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में शुभ माना जाता है। विवाह, पूजा और त्योहारों में केला के पत्तों और तनों का प्रयोग अनिवार्य है।यही कारण है कि केला का कंद भी भारतीय जीवन का हिस्सा बन गया और पीढ़ी दर पीढ़ी इसे पारंपरिक भोजन में शामिल किया जाता रहा।

Table of Contents

केला के कंद का सब्जी

स्वादिष्ट केला के कंद का सब्जी
Prep Time 10 minutes
Cook Time 20 minutes
Total Time 30 minutes
Course Main Course
Cuisine Indian
Servings 4 4
Calories 112 kcal

Ingredients
  

  • 250  ग्राम केला के कांड
  • 5 ग्राम सरसों (पीला)
  • 10 ग्राम लहसुन
  • 5 ग्राम  गोल मिर्च पाउडर
  • 10 ग्राम  लाल मिर्च पाउडर
  • 5 ग्राम  हल्दी पाउडर
  • 2 ग्राम  पंचफोरन
  • 5 ग्राम   फिश मसाला
  • 100 ग्राम  सरसों तेल
  • 1 पीस टमाटर
  • 20 ग्राम  धनिया पत्ता
  • 2 tbsp नमक स्वाद अनुसार 

Instructions
 

  • केला के कंद का सब्जी बनाने कि बिधि
    केला के कंद का सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले एक केला के पेड़ को जमीन से जड़ सहित खोदकर निकाल ले,पेड़ से ताना काटकर जड़ से अलग कर ले, जड़ वाले भाग को पानी से अच्छे से धो ले फिर जड़ को चाकू से छील ले ,सफेद रंग का कंद दिखाई देगा उस कंद बाले भाग को पानी से अच्छी तरह धो ले फिर काटकर अलग बर्तन मे निकाल कर रख ले
    अब कटे हुए केला के कंद को एक-एक इंच का पनीर जैसा टुकड़ा के तरह काट लेना है फिर कटे हुए टुकड़े को पानी से दो बार अच्छी तरह से धो लेना है धोने के बाद एक हांडी मे पानी डालकर उबलने के लिए चूल्हा जलाकर उस पर चढ़ा दे तब तक उबालना है जब तक वह पक नहीं जाए,जब पक जाए तो चूल्हा बंद कर दे पानी को ठंडा होने दे जब ठंडा हो जाए तब बर्तन में से कंद को निकाल कर अकग रख ले।
    फिर 2 बार पानी से अच्छी तरह धोकर एक बर्तन में रख ले, चूल्हा जलाकर उस पर कराही चढ़ा कर कराही को गर्म होने दे जब कराही गर्म हो जाए, तब उसमें 50 ग्राम सरसों तेल डालकर सरसों तेल को गर्म होने दे, जब सरसो तेल गर्म हो कर तेल से धुआँ निकलने लगे तब उबले हुए केला के कंद के टुकड़े को डालकर हाफ फ्राई करके एक अलग बर्तन में निकालकर रख ले।
    ग्राइंडर मशीन चालू करें इसमें सरसों और लहसुन को डालकर अलग-अलग पीसकर अलग अलग प्लेट में निकाल कर रख ले।
    टमाटर को पानी से धो कर बारीक काट ले, धनिया पत्ता के जड़ काट कर फेक दे फिर पानी से धो कर बारीक काटकर अलग प्लेट में रख लें।चूल्हा पर कराही चढ़ाकर चूल्हा जला ले कराही गर्म होने दे जब कराही गर्म हो जाए तब 50 ग्राम सरसों का तेल डाल दें, सरसो तेल को गर्म होने दे।
    जब सरसो तेल गर्म हो जाए तब पंचफोरन को डालकर पंचफोरन को चटकने दे, जब पंचफोरन चटक जाये तब पिसा हुआ सरसो और लहसुन को डालकर भुने,5 मिनट तक अच्छे से भूने।
    5 मिनट बाद फिर हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, गोल मिर्च पाउडर, नमक स्वाद अनुसार डालकर चलाए।
    सभी को अच्छी तरह 10 मिनट तक भूनें, फिर फ्राइ किया हुआ केला कंद को इस में डालकर 5 मिनट तक भुनने के बाद 100 ग्राम गर्म पानी डाल दे, एक उबाल आने के बाद इसमें कटा हुआ टमाटर डालकर,5 मिनट तक खौलने दे,5 मिनट के बाद फिर धनिया के पत्ता से गार्निश करके चूल्हा बंद कर दें। केला के कंद का सब्जी बनकर तैयार है सर्व करें।
Keyword केला के कंद का सब्जी
  •  केला के कंद का सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले एक केला के पेड़ को जमीन से जड़ सहित खोदकर निकाल ले,पेड़ से ताना काटकर जड़ से अलग कर ले, जड़ वाले भाग को पानी से अच्छे से धो ले फिर जड़ को चाकू से छील ले ,सफेद रंग का कंद  दिखाई देगा उस कंद बाले भाग को पानी से अच्छी तरह धो ले फिर काटकर अलग बर्तन मे निकाल कर रख ले
  • अब कटे हुए केला के कंद  को एक-एक इंच का पनीर जैसा टुकड़ा के तरह काट लेना है फिर कटे हुए टुकड़े को पानी से दो बार अच्छी तरह से धो लेना है धोने के बाद एक हांडी मे पानी डालकर उबलने के लिए चूल्हा जलाकर उस पर चढ़ा दे तब तक उबालना है जब तक वह पक नहीं जाए,जब पक जाए तो चूल्हा बंद कर दे पानी को ठंडा होने दे जब ठंडा हो जाए तब बर्तन में से कंद को निकाल कर अकग रख ले।
  • फिर 2 बार पानी से अच्छी तरह धोकर एक बर्तन में रख ले, चूल्हा जलाकर उस पर कराही चढ़ा कर कराही को गर्म होने दे जब कराही गर्म हो जाए, तब उसमें 50 ग्राम सरसों तेल डालकर सरसों तेल को गर्म होने दे, जब सरसो तेल गर्म हो कर तेल से धुआँ निकलने लगे तब उबले हुए केला के कंद के टुकड़े को डालकर हाफ फ्राई करके एक अलग बर्तन में निकालकर रख ले।
  • ग्राइंडर मशीन चालू करें इसमें सरसों और लहसुन को डालकर अलग-अलग पीसकर अलग अलग प्लेट में निकाल कर रख ले।
  • टमाटर को पानी से धो कर बारीक काट ले, धनिया पत्ता के जड़ काट कर फेक दे फिर पानी से धो कर बारीक काटकर अलग प्लेट में रख लें।चूल्हा पर कराही चढ़ाकर चूल्हा जला ले कराही गर्म होने दे जब कराही गर्म हो जाए तब 50 ग्राम सरसों का तेल डाल दें, सरसो तेल को गर्म होने दे।
  • जब सरसो तेल गर्म हो जाए तब पंचफोरन को डालकर पंचफोरन को चटकने दे, जब पंचफोरन चटक जाये तब पिसा हुआ सरसो और लहसुन को डालकर भुने,5 मिनट तक अच्छे से भूने।
  • 5 मिनट बाद फिर हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, गोल मिर्च पाउडर, नमक स्वाद अनुसार डालकर चलाए।
  • सभी को अच्छी तरह 10 मिनट तक भूनें, फिर फ्राइ किया हुआ केला कंद को इस में डालकर 5 मिनट तक भुनने के बाद 100 ग्राम गर्म पानी डाल दे, एक उबाल आने के बाद इसमें कटा हुआ टमाटर डालकर,5 मिनट तक खौलने दे,5 मिनट के बाद फिर धनिया के पत्ता से गार्निश करके चूल्हा बंद कर दें।  केला के कंद का सब्जी बनकर तैयार है सर्व करें।

केला के कंद का सब्जी की वैराइटी (प्रकार)

केला के कंद का सब्जी से अलग–अलग तरह की डिशेज़ बनाई जाती हैं। हर राज्य और क्षेत्र में इसके अपने-अपने स्वाद और रेसिपी की पहचान है।

1. केला कंद की सूखी सब्ज़ी

उत्तर भारत (बिहार, यूपी, झारखंड) में लोकप्रिय।सरसों का तेल, हरी मिर्च, प्याज और बेसिक मसालों के साथ बनाई जाती है।खाने में हल्की और पौष्टिक।

2. केला कंद की झोल/करी

मसालों और टमाटर-प्याज की ग्रेवी में कंद पकाया जाता है।चावल या रोटी के साथ खाने के लिए उपयुक्त।बंगाल और ओडिशा में अधिक लोकप्रिय।

3. थोर घंटो (Thor Ghonto – बंगाली स्पेशल)

केले के तने के साथ मूली, आलू और मछली का सिर मिलाकर बनी पारंपरिक बंगाली डिश।स्वाद में अनोखी और पोषण से भरपूर।

4. वाज़ा थंडु तोरन (Vazha Thandu Thoran – केरल)

केले के कंद को नारियल, करी पत्ता और हल्के मसालों के साथ बनाया जाता है।यह पूरी तरह सात्विक और हल्की डिश है।

5. वाज़ाइथंडु पोरियाल (Vazhaithandu Poriyal

तमिलनाडु)कटा हुआ केला कंद हल्के मसाले और कद्दूकस किए नारियल के साथ भुना जाता है।इसे चावल और सांभर के साथ परोसा जाता है।

6. केला कंद का कोफ्ता

कंद को उबालकर मसाले और बेसन मिलाकर कोफ्ते बनाए जाते हैं।टमाटर-प्याज की ग्रेवी में डालकर शाही अंदाज़ में परोसा जाता है।

7. केला कंद की चटनी/अचार

सरसों, हरी मिर्च और नींबू के साथ खट्टा–तीखा स्वाद।खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखकर खाया जाता है।

8. केला कंद का सूप / रस

आयुर्वेदिक और हेल्दी विकल्प।पाचन, किडनी और यूरिन संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है।

9. केला कंद की खिचड़ी

दाल और चावल के साथ कंद मिलाकर पौष्टिक खिचड़ी तैयार की जाती है।हल्के और स्वास्थ्यवर्धक भोजन के रूप में उत्तम।

केला के कंद का सब्जी – सर्विंग सुझाव

1. चावल के साथ

गरमागरम सादी दाल-भात (चावल-दाल) के साथ केला कंद की सूखी या झोल वाली सब्ज़ी परोसें।

दही और पापड़ जोड़ने से थाली का स्वाद और भी बढ़ जाता है।

2. रोटी/पराठा के साथ

गेहूँ की रोटी, फुल्का या बाजरे की रोटी के साथ इसे खाएँ।खासकर मसालेदार करी या कोफ्ता स्टाइल सब्ज़ी पराठे के साथ शानदार लगती है।

3. सूप या रस के रूप में

केला कंद का हल्का सूप बनाकर भोजन से पहले परोसा जा सकता है।यह डिटॉक्स ड्रिंक की तरह भी काम करता है।

4. साइड डिश के रूप में

दक्षिण भारतीय थाली में इसे “तोरण” या “पोरियाल” के रूप में परोसा जा सकता है।नींबू का रस या हरी मिर्च की चटनी साथ देने पर स्वाद दोगुना हो जाता है।

5. सलाद और रायता के साथ

केला कंद की करी को खीरे, टमाटर और प्याज़ के सलाद के साथ परोसें।रायते के साथ इसका कॉम्बिनेशन भोजन को हल्का और ताज़गीभरा बनाता है।

6. त्योहार या व्रत में

व्रत/उपवास में सेंधा नमक और हल्के मसालों के साथ बनी सब्ज़ी दही या फलाहारी खिचड़ी के साथ परोसी जा सकती है।

7. विशेष अवसरों पर

केला कंद के कोफ्ते को शाही ग्रेवी में बनाकर दावत या शादी-ब्याह के भोज में परोसा जा सकता है।इसे नान, तंदूरी रोटी या पुलाव के साथ परोसना उत्तम है।

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केला के कंद का सब्जी के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ:

1. गुर्दे (किडनी) के लिए फायदेमंद

  • केले के कंद का रस मूत्र विकारों और किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) में उपयोगी माना जाता है।
  • यह पेशाब बढ़ाता है (डाययूरेटिक), जिससे विषैले तत्व शरीर से बाहर निकलते हैं।

2. पथरी (Stone) निकालने में सहायक

  • केला कंद का रस पथरी को तोड़कर मूत्र मार्ग से निकालने में मदद करता है।
  • आयुर्वेद में इसे “व्रिक्कशोधन” के रूप में वर्णित किया गया है।

3. मधुमेह (डायबिटीज) में सहायक

  • केला कंद में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है और यह रक्त शर्करा (Blood Sugar) को संतुलित रखने में मदद करता है।

4. पाचन तंत्र को बेहतर बनाए

  • इसमें फाइबर अधिक होता है, जिससे कब्ज (constipation) में राहत मिलती है।
  • गैस, अपच और एसिडिटी में केला कंद की सब्ज़ी फायदेमंद मानी जाती है।

5. मोटापा घटाने में सहायक

  • कंद में कैलोरी कम होती है और यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे भूख कम लगती है।
  • यह वजन कम करने वाले आहार में उपयोग किया जा सकता है।

6. आंतों की सूजन और बवासीर में राहत

  • केला कंद का सेवन आंतों की सूजन और बवासीर (piles) के दर्द में आराम देता है।
  • यह मल को मुलायम बनाकर आसानी से बाहर निकालने में सहायक होता है।

7. एनीमिया (खून की कमी) में लाभकारी

  • केले के कंद में आयरन और अन्य खनिज होते हैं, जो खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं।

8. प्राकृतिक डिटॉक्स (शरीर शुद्धि) के लिए उपयोगी

  • केले का कंद शरीर में जमे टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है।
  • यह लिवर और किडनी की सफाई में सहायक है।

9. महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

  • मासिक धर्म की अनियमितता, अधिक रक्तस्राव और यूट्रस संबंधित रोगों में केला कंद लाभदायक माना जाता है।

10. कैंसर विरोधी गुण

  • केले के कंद में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं।
  • यह ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर जैसे कुछ प्रकार के कैंसर में सहायक सिद्ध हो सकता है (अनुसंधान जारी है)।

केला के कंद का सब्जी का पोषण चार्ट

(100 ग्राम कच्चे कंद में)

पोषक तत्वमात्रास्वास्थ्य लाभ
कैलोरी25–35 kcal कम कैलोरी वाला, वज़न नियंत्रित रखने में मददगार
कार्बोहाइड्रेट6 g ऊर्जा प्रदान करता है, हल्का पचता है
प्रोटीन0.9 g मांसपेशियों को मजबूत करता है
फाइबर2.5–3 g पाचन सुधारता है, कब्ज दूर करता है
कैल्शियम40 mg हड्डियों और दांतों को मजबूत करता है
पोटैशियम350–400 mg ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, दिल को स्वस्थ रखता है
आयरन0.8 mg खून की कमी (एनीमिया) से बचाता है
विटामिन C 6 mgरोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
मैग्नीशियम30 mgमांसपेशियों और नसों को रिलैक्स करता है
पानी90% तकशरीर को हाइड्रेटेड रखता है, डिटॉक्स में सहायक

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. केला के कंद की सब्ज़ी क्या है

A केला का कंद यानी केले के पौधे का तना (Stem / Corm) जिसे छीलकर अंदर का सफ़ेद हिस्सा काटकर सब्ज़ी, करी, चटनी या सूप के रूप में पकाया जाता है। यह भारतीय ग्रामीण और पारंपरिक भोजन का हिस्सा है।

Q2. क्या केला कंद खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है

A हाँ, बिल्कुल। इसमें फाइबर, पोटैशियम, कैल्शियम और विटामिन C प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह पाचन सुधारता है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करता है और किडनी स्टोन से बचाव में मदद करता है।

Q3. केला कंद को काटने के बाद काला क्यों पड़ जाता है

A केला कंद में प्राकृतिक ऑक्सीडेशन (iron content) होने के कारण हवा लगते ही यह काला हो जाता है। इसे रोकने के लिए काटे हुए टुकड़ों को पानी में नींबू का रस या छाछ डालकर भिगोकर रखा जाता है।

Q4. क्या डायबिटीज़ वाले लोग केला कंद खा सकते हैं

A जी हाँ। केला कंद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बहुत कम होता है, इसलिए यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। डायबिटीज़ रोगियों के लिए यह बहुत फायदेमंद है।

Q5. केला कंद कब और कैसे खाया जाना चाहिए

A इसे ताज़ा और कोमल अवस्था में काटकर सब्ज़ी, थोरन, पोरियाल, करी या सूप के रूप में खाया जा सकता है। अधिक पुराने या सख़्त तनों से सब्ज़ी का स्वाद अच्छा नहीं आता।

Q6. क्या केला कंद वजन घटाने में मदद करता है

A हाँ, इसमें कैलोरी बहुत कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

Q7. केला कंद खाने से कौन-कौन सी बीमारियों में लाभ होता है

A पथरी (किडनी स्टोन), कब्ज़, ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज़ और यूरिन संबंधी समस्याओं में यह बहुत उपयोगी है।

Q8. क्या केला कंद को उपवास में खाया जा सकता है

A हाँ, उपवास में इसे सात्विक तरीके से कम मसालों और सेंधा नमक के साथ बनाया जा सकता है। यह पेट को हल्का और पाचन के लिए उत्तम है।

Q9. क्या बच्चे और बुजुर्ग भी इसे खा सकते हैं

Aजी हाँ। हल्का मसाला डालकर बनी सब्ज़ी बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी पौष्टिक और आसानी से पचने योग्य होती है।

Q10. केला कंद की सब्ज़ी किन-किन राज्यों में लोकप्रिय है

A बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और केरल में इसकी अलग-अलग पारंपरिक रेसिपी बनाई जाती हैं।

निष्कर्ष:

केले का कंद एक सस्ता, आसानी से मिलने वाला और औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक खाद्य पदार्थ है। इसे अपने नियमित आहार में शामिल कर के आप किडनी, पाचन और वजन जैसे कई स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं।

भारतीय ग्रामीण रसोई में यह एक औषधीय सब्ज़ी मानी जाती है, जो विशेष तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को शुद्ध रखने में मदद करती है। यह न केवल एक व्यंजन है, बल्कि एक “घरेलू औषधि” भी मानी जाती है।